मुजफ्फरपुर बालिका कांडः 42 में से 29 नहीं 34 बच्चियों के साथ हुआ था यौन शोषण

बच्चियों का ही नहीं, बाल गृहों में रह रहे बच्चों के साथ भी होता था यौन शोषण

पटनाः मुजफ्फरपुर बालिका अल्पावास गृह में 29 बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न की सनसनीखेज घटना के खुलासे के बाद सूबे सहित पूरे देश में इस घटना की चर्चा हो रही है। जांच के दौरान नित नये खुलासे उजागर हो रहे है। वहीं इस मामले में जांच कर रही मुजफ्फपुर की एसएसपी हरप्रीत कौर ने एक और चौकानें वाला और भयावह खुलासा करते हुए बताया कि बालिका गृह की 42 में से 29 नहीं 34 बच्चियों के साथ बलात्कार हुआ है, यह बात जांच के दौरान सामने आई है। वहीं शनिवार कोर्ट में यौन पीड़ित लड़कियों ने रोगंटे खड़े कर देने वाली दास्ता सुनाई, जिसे हर कोई वह दर्द सुना तो आक्रोशित होने से अपने को रोक ना सका। मालूम हो कि पीएमसीएच की जांच रिपोर्ट के मुताबिक 29 बच्चियों से बलात्कार की बात कही जा रही थी। वहीं, दूसरी ओर इससे भी ज्यादे हैरत वाली बात सामने आई है कि प्रदेश में केवल मुजफ्फरपुर बालिका गृह ही नहीं बल्कि कई बाल गृहों में भी यौनशोषण और अन्य अनियमितताएं धड़ल्ले से होती थीं। यहां प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्‍थापित बाल गृह में रहने वाले लड़कों ने गृह संचालक पर मारपीट और यौन शोषण का आरोप लगाया। इसका खुलासा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस (टिस) के सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) में हुआ है। पार्टियां राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है। मालूम हो इससे पहले बालिका गृह में रही 44 लड़कियों में 42 की मेडिकल जांच कराए जाने पर उनमें से 29 के यौन शोषण की पुष्टि हुई थी। इसमें दो लड़कियों के बीमार होने के कारण उनकी जांच नहीं हो पायी है।
हालांकि, इस मामले में बिहार की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह की लड़कियों के यौन उत्पीड़न मामले की जांच सीबीआई से कराने के आदेश दे दिये हैं। इस मामले को लेकर बिहार की पूरे देश में किरकिरी हुई है और विपक्ष इस कांड को लेकर लगातार हमलावर है।
बालिका गृह ही नहीं, बाल गृहों में भी होता था यौनशोषण
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस के रिपोर्ट में हुए ‌खुलासे में सामने आया है कि मोतिहारी, भागलपुर, मुंगेर और गया में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से संचालित बालगृह में रह रहे बच्चे भी सुरक्षित नहीं है। यहां के बच्चों ने अपने ऊपर संचालक द्वारा यौन शोषण का शिकार बताया है। मोतिहारी के बाल गृह में रहने वाले लड़कों ने गृह संचालक पर मारपीट और यौनशोषण का आरोप लगाया। गया जिला में स्‍थापित बाल गृह में लड़कों को वहां के अधिकारियों पर बच्चों को हमेशा ताला बंद कर रखने और महिला स्टाफ द्वारा बच्चों से जबरन काम कराने का आरोप लगाया गया। इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गयी है।
लड़कियों के साथ हर रात होता था बलात्कार
यौन शोषण की शिकार लड़कियों ने कोर्ट में रोंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती सुनाई और कहा कि वह किस तरह शारीरिक और मानसिक पीड़ा से गुजरी है। बच्चियों से हुए यौन आतंक के इस बड़े मामले में दुष्कर्म पीड़ित 34 नाबालिग लड़कियों में से छह गर्भवती हो गई थीं। जिनमें से तीन का गर्भपात भी कराया गया था। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयान में दस वर्ष की एक पीड़िता ने कहा कि सूरज के ढलते ही बालिका गृह की लड़कियों के बीच दहशत फैल जाती थी। रातें आतंक की तरह बीतती थीं। स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के सामने दिए गए बयान में लड़कियों ने बताया कि उन्हें बुरी तरह पीटा जाता था, भूखा रखा जाता था, ड्रग्स के इंजेक्शन दिए जाते थे और तकरीबन हर रात उनके साथ दुष्कर्म किया जाता था।
असहनीय पीड़ा में गुजरता था रात और दिन
लड़कियों ने बताया कि खाना खाते ही उन्हें गहरी नींद सताने लगती थी। कुछ मिनट बाद वे बेसुध हो जाती थीं। सुबह जब आंख खुलती थी तो शरीर में असहनीय पीड़ा होती थीं। 16 वर्षीय एक लड़की ने बताया कि बेहोशी की दवा खाने से उसकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी। जब सच्चाई का पता चला तो उसने दवा युक्त खाना खाने से इन्कार कर दिया। ब्रजेश ने उसे कार्यालय में बुलाकर खाना खाने के लिए बाध्य किया तो उसने कह दिया कि मुझे पता है, मेरे साथ बेहोशी में क्या होता है? आप मुझे मारें-पीटें नहीं, मैं हर काम करने के लिए तैयार हूं। इसके बाद ब्रजेश ने उसे शाबाशी दी और कपड़े उतारने को कहा, फिर अपने मोबाइल से उसका अश्लील वीडियो बनाया और बताया कि इसे नेताओं और अधिकारियों को भेजेगा। जिसके साथ तुम अगली रात रहोगी, वह रिप्लाई करेगा।
महिला कर्मचारी बच्चियों को शारीरिक संबंध बनाने के लिए करती थी मजबूर
इस मामले में बालिका गृह से गिरफ्तार सात महिलाएं लड़कियों को प्रताड़ित करने से लेकर बाहरी लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करती थी। इन सभी सात महिलाओं को मुजफ्फरपुर पुलिस ने दो जून को गिरफ्तार किया था और पीड़ित लड़कियों के बयान के आधार पर पोक्सो एक्ट के तहत अगले ही दिन जेल भेज दिया गया है।
शारीरिक संबंध बनाने से पहले बच्चियों को ड्रग्स दिया जाता था
दूसरी पीड़िता ने बताया कि आमतौर पर दुष्कर्म से पहले उसे ड्रग्स दिया जाता था। होश में आने पर उसके प्राइवेट पार्ट्स में जख्म और दर्द का सिलसिला चलता था। कोर्ट के सामने सात साल की एक और पीड़िता ने बताया कि दुष्कर्म के दौरान उसके हाथ पैर बांध दिए जाते थे। विरोध करने पर तीन दिन तक भूखा रखा जाता था और बेरहमी से मारा जाता था। सात साल की ही एक लगभग गूंगी पीड़िता ने बताया कि उसे दो दिन भूखा रखा गया और वह हार गई। दस साल की एक पीड़िता ने कहा कि उसके प्राइवेट पार्ट्स पर जख्म के दाग बन गए हैं। उसके साथ लगातार प्रताड़ना और दुष्कर्म के बाद वह कई दिनों तक चलने-फिरने के काबिल नहीं रही।
दो तरह के होते थे रजिस्टर, एक रजिस्टर से दलाली का काम होता
जहां-तहां भूली-भटकी लड़कियों को थाना पुलिस पकड़कर लाती थी और उन्हें बालिका आश्रय गृह तक पहुंचाया जाता था। इस प्रक्रिया में हर चौराहे पर दलाल खड़ा होता था। ब्रजेश के पास दो तरह के रजिस्टर थे। इनमें एक ही लड़की के अलग-अलग नाम लिखे होते थे। एक रजिस्टर सरकारी दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल होता था और दूसरे में उसी लड़की का नाम बदल दिया जाता था, जिसको देह व्यापार में झोंका जाता था।

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