बीएस येदियुरप्पा ने ली शपथ, तीसरी बार बने राज्य के सीएम

नई दिल्‍ली: कर्नाटक में सियासी रार अपने पूरे चरम पर है। कर ‘नाटक’ में भाजपा के बीएस येदियुरप्पा ने सीएम पद की शपथ ले ली है। इस दौरान शपथग्रहण समारोह में केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार के साथ प्रकाश जावड़ेकर और जेपी नड्डा समेत भाजपा के कई बड़े नेता मौजूद रहे। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। राज्यपाल वजुभाई आर वाला येदियुरप्पा को सीएम पद की शपथ दिलाई और गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। अब येदियुरप्पा के सामने सबसे बड़ी चुनौती विधायकों के हस्ताक्षर जुटाकर बहुमत साबित करना है।
5 साल का कार्यकाल पूरा करने का सपना कभी पूरा नहीं हुआ
यह तीसरी बार है, जब बीएस येदियुरप्‍पा ने कर्नाटक की गद्दी पर अपना कब्‍जा किया है, लेकिन उनका सीएम के रूप में अपने 5 साल का कार्यकाल पूरा करने का सपना कभी पूरा नहीं हुआ है।
महज 1 सप्ताह के लिए मिला था सत्ता का सुख
येदियुरप्‍पा कर्नाटक राज्‍य की शिकारीपुर विधानसभा से चुनाव लड़ते और जीतते आ रहे हैं। सबसे पहले बीएस येदियुरप्‍पा ने 2007 में मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन उस समय वह महज 7 दिन के लिए ही सीएम पद पर रह सके थे। लिंगायत समाज से आने वाले येदियुरप्पा का जन्म 27 फरवरी 1943 को मांड्या जिले के बुक्कनकेरे में हुआ था। येदियुरप्‍पा चुनाव-दर-चुनाव कर्नाटक की जनता में अपनी पैंठ बनाते रहे और कर्नाटक की राजनीति के पटल पर चमकते रहे। साल 2007 में कर्नाटक में राजनीतिक उलटफेर का दौर हुआ। येदियुरप्‍पा के ही प्रयासों से कांग्रेस की सरकार गिरा दी गई और सत्ता में जेडीएस-भाजपा गठबंधन आ गया। जेडीएस-भाजपा के इस गठबंधन में हुए समझौते के तहत पहले कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन जब उनके हटने और येदियुरप्पा के मुख्‍यमंत्री बनने का मौका आया तो, स्थितियां पलट गईं और वह महज 7 दिन ही सीएम पद पर रह सके। 12 नवंबर 2007 को शपथ लेने वाले येदियुरप्‍पा को 19 नवंबर को ही इस्‍तीफा देना पड़ा। जिसके बाद कर्नाटक में राष्‍ट्रपति शासन लागू किया गया।

अभी भी फंसे हैं कई पेंच

सुप्रीम कोर्ट को संतुष्ट करना : येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण समारोह पर रोक नहीं लगाकर भले ही सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत दी हो पर इस मामले पर उसकी पूरी नजर है। आज ही कर्नाटक की कमान संभालने वाले येदियुरप्पा को हर हाल में शीर्ष अदालत को संतुष्ट करना होगा। उसने कल सुबह 10 बजे तक येदियुरप्पा से विधायकों की सूची मांगी है। साथ ही राज्यपाल को उनके द्वारा सरकार बनाने का दावा करने वाला पत्र भी सौंपना होगा।

कांग्रेस और जद एस के विधायकों में सेंध : येदियुरप्पा दावा कर रहे हैं कि वह सदन में अपना बहुमत साबित कर देंगे। उनके पास 104 विधायक है लेकिन उन्हें फिलहाल सात और विधायकों का समर्थन चाहिए। बताया जा रहा है कि कांग्रेस और जदएस में कुछ विधायक उनके संपर्क में है और सदन में यह विधायक उनका ही साथ देंगे।

अपने विधायकों को रोकना : जिस प्रकार भाजपा विपक्षी विधायकों पर डोरे डाल रही है उसी तर्ज पर कांग्रेस और जेडीएस की नजर भी भाजपा विधायकों पर है। उन्हें अपने विधायकों को साधना होगा। इस स्थिति में ईश्वरप्पा जैसे कई दिग्गज नेताओं को उन्हें मनाना होगा।
मंत्रिमंडल का गठन : येदियुरप्पा सरकार के लिए मंत्रिमंडल का गठन भी बड़ा चुनौतीपूर्ण रहेगा। उन्हें सरकार को समर्थन दे रहे विधायकों को तो खुश करना ही होगा साथ ही पार्टी के टिकट पर चुने गए नेताओं को भी नाराज करने से बचना होगा।

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