तीन अखबारों का मालिक ब्रजेश की राजदार मधु अभी भी कानून के लंबें हाथ से दूर

पटना : मुजफ्फरपुर बालिका गृह में बच्चियों के साथ यौन मामले में जांच तेज हो गई है। इस मामले में हर दिन नये हैरतअंगेज खुलासे हो रहे है। पुलिस ने बालिका गृह में बच्चियों के साथ यौन शोषण मामले में मुख्य आरोपी सरगना ब्रजेश ठाकुर को गिरफ्तार तो कर लिया है। लेकिन कानून के लंबे हाथ से अभी भी मधु दूर है। ब्रजेश ठाकुर की सबसे बड़ी राजदार रही मधु कुमारी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। मधु मुजफ्फरपुर और बेतिया में सेक्स वर्करों के लिए पुनर्वास योजना चलाती थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार वह सेक्स वर्करों को पटना के ब्यूटी पॉर्लरों में भेजती थी। इस तरह वह देह व्यापार से जुड़े अवैध कारोबार की सूत्रधार बनी हुई थी।
मधु कहां है, वह मिले तो राज खुले
वो कहां है इसकी जानकारी किसी को नहीं है। जांच एजेंसियों को उसकी तलाश है, लेकिन अभी तक उसको ढूंढ निकालने की सारी कोशिशें नाकाम रही हैं। बहुचर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में ब्रजेश ठाकुर की करीबी मधु की तलाश लंबे समय से है, लेकिन अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। मधु की तलाश में कई जगह पर छापेमारी भी हुई है। मधु के मिलने पर मामले में कई और राज खुल सकते हैं।
2003 से शुरू किया था मधु ने अभियान
साल 2003 में मुजफ्फरपुर के रेड लाइट एरिया में पुनर्वास के लिए वर्तमान एसपी ने अभियान शुरू किया था। उसी समय मधु ने कुछ महिलाओं को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए वामा शक्ति वाहिनी नाम से संस्था की शुरुआत की। यह पहली बार था जब बिहार में किसी संस्था ने रेड लाइट एरिया की महिलाओं के लिए पुनर्वास का काम शुरू किया था। उस समय पूरे देश में यह खबर चर्चा का विषय बनी थी। मधु कुमारी और ब्रजेश ने मिलकर 50 महिलाओं का एक गैंग तैयार किया। उसे दिखाकर कई कौशल विकास और लाइवली हुड का प्रशिक्षण देने के नाम पर सरकार से कई योजनाएं भी ली। वर्तमान में मधु की वामा शक्ति वाहिनी बिहार राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी द्वारा सेक्स वर्करों को एचआईवी से बचाने के लिए मुजफ्फरपुर और बेतिया में योजनाएं चला रही है। यही नहीं मुजफ्फरपुर में ही सेवा संकल्प समिति एड्स कंट्रोल सोसाइटी की दो योजनाएं चला रहा है।
ब्रजेश के संग 14 जिलों में फैला रखा था जाल
इन दोनों संस्थाओं को एड्स कंट्रोल सोसाइटी ने ही पहली फंडिंग दी थी। सोसाइटी वामा शक्ति वाहिनी को 27 लाख रुपये पिछले साल तक दे रही थी। सेवा संकल्प समिति को लिंक वर्कर और लक्षित परियोजना के तहत हर साल एक करोड़ दस लाख रुपये फंड दिये गए। दोनों संस्थाओं ने 14 जिलों में अपना जाल फैला रखा था। इसकी योजनाओं में ब्रजेश के सगे-संबंधी ही शामिल हैं।

बच्चियों का दर्द सुनना लाश गोद में उठाने से ज्यादा मुश्किल
मुजफ्फरपुर महिला थाना की अध्यक्ष ज्योति कुमारी ने बालिकागृह कांड की फाइलें सीबीआई को सौंपने के कहा कि उन्होंने कई जघन्य अपराधों का अनुसंधान किया है, मगर मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड अब तक की वारदातों से अलग है। यह अजीब वारदात है! मैंने घटनास्थल से लाश को भी गोद में उठाया, लेकिन बालिका गृह की बच्चियों के दर्द बयान में दर्ज करना बहुत कष्टदायक था। सर्वाधिक चौँकाने वाली बात यह थी कि बेहसारा और लाचार बच्चियों के रक्षक ही भक्षक बन जाते थे। पूछताछ के दौरान पीड़ित लड़कियों ने बताया कि जब काउंसिलिंग के समय उनके साथ जुर्म सारी हदें पार करता था। दिन में उनके साथ अक्सर ‘गलत काम’ तब होता था, जब कोई काउंसिलिंग के लिए आता था। संकटग्रस्त लड़कियां अक्सर अवसाद की शिकार होती हैं। उन्हें सदमे से उबारते हुए मानिसक ताकत और हौसला देने के लिए नियमित काउंसिलिंग का प्रावधान है, परन्तु काउंसिलिंग के बजाय उनका यौन शोषण होता था।
ब्रजेश ने कैसे बढ़ाया अपना सामाज्य
बालिका यौन शोषण कांड के आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने पत्रकारिता की आड़ में एनजीओ का साम्राज्य खड़ा कर रखा था। एक तरफ अखबारों का कारोबार बढ़ा कर अपने बेटे और बेटी को स्थापित कर रहा था तो खुद एनजीओ के सहारे अपनी कमाई बढ़ाने में लगा था। 1987 में सेवा संकल्प एवं विकास समिति के नाम से एनजीओ की शुरुआत की। शुरु में इधर उधर हाथ पांव मारकर छोटे छोटे काम लिए पर बाद में अपने साथ मधु नाम की एक महिला को इस संस्था से जोड़ लिया। मधु के बारे में बताया गया कि ये खुद मुजफ्फरपुर की बदनाम गली चतर्भुज स्थान से निकली थी।
सेवा संकल्प से शुरु किया काम
इसे अपने साथ रखकर 2010 में पटना स्थित बिहार एड्स सोसायटी में अपनी पैठ बढ़ाई। मधु को अपने एनजीओ में प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनाया ओर इसके माध्यम से 2010 में पहला टेंडर लिया। ये संस्था मुफ्फरपुर में एड्स से रोकथाम करने और लोगों में इसके लिए जागरूकता फैलाने का काम लिया। शरुआत के दिनों में मधु ने अपने काम की बदौलत सोसायटी में अच्छी जगह बना ली। इसके के सेवा संकल्प संस्था को 6 जगहों पर काम मिल गया। मुजफ्फपुर में दो, दरभंगा में 1 समस्तीपुर में 2 और बेतिया में एक काम मिला। सभी जगहों पर एनजीओ का काम धड़ल्ले से चलने लगा।
ब्रजेश एक्सक्यूटिव डायरेक्टर, मधु प्रोजेक्ट डायरेक्टर
वहीं एक संस्‍था की फाइल मिली। जिसमें इस संस्था के बारे में मोबाइल नंबर के साथ पूरी जानकारी है। इस संस्था में रमेश सचिव हैं जबकि ब्रजेश ठाकुर अपना नाम ब्रजेश कुमार के नाम से इस संस्था में चीफ फक्शनरी एक्सक्यूटिव डायरेक्टर हैं। सभी कागजातों में रमेश के दस्तखत हैं जबकि मधु प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं। एड्स सोसायटी के दफ्तर में कैमरे पर इस बारे में कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है पर यहां के पदाधिकारियों ने बताया की इस दफ्तर में रमेश, ब्रजेश और मधु का आना जाना था। रमेश बतौर सचिव अपना हस्ताक्षर करता था। ज़्यादातर मधु ही एड्स सोसायटी में आती जाती थी। एनजीओ के बालिका गृह के कारनामों के बाद एड्स सोसायटी की प्रोजेक्ट डायरेक्टर करुणा कुमारी ने सेवा संकल्प समिति को काली सूची में डाल दिया है। सीबीआई की जांच के घेरे में ब्रजेश ठाकुर का एनजीओ भी आएगा ऐसे में एड्स सोसायटी में भी ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ का बही खाता तैयार किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक ब्रजेश ठाकुर ने एड्स सोसायटी में तीन अलग अलग नाम में एनजीओ बनाकर अलग अलग ज़िलों में काम ले रखा था।
तीन अखबारों का मालिक है ब्रजेश
बालिका गृह यौन शोषण मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में प्रकाशित होने वाले तीन अखबारों का मालिक भी है। रिपोर्ट के अनुसार ब्रजेश तीन अखबारों मुजफ्फरपुर से प्रकाशित एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र प्रात: कमल, पटना से प्रकाशित एक अंग्रेजी अखबार न्यूज नेक्स्ट और समस्तीपुर जिला से उर्दू में प्रकाशित एक अखबार हालात-ए-बिहार से प्रत्यक्ष या परोक्ष से जुड़ा हुआ है ।
पुत्र को संवाददाता, तो संपादक रामशंकर को बनाया
ब्रजेश को प्रात: कमल के विशेष संवाददाता के रूप में भी सूचीबद्ध किया गया है। उसके पुत्र राहुल आनंद न्यूज नेक्स्ट के संवाददाता और हालात-ए-बिहार के संवाददाता के रूप में एक शाईस्ता परवीन तथा संपादक के रूप में रामशंकर सिंह का नाम दर्शाया गया है।
मान्यता प्राप्त था ब्रजेश
ब्रजेश को पीआईबी और राज्य सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (आईपीआरडी) दोनों से मान्यता प्राप्त पत्रकार का दर्जा प्राप्त था, जो कि उनके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद उनकी मान्यता दोनों जगहों से रद्द कर दी गयी। आईपीआरडी सूत्रों ने बताया कि उत्तर बिहार से जुड़ी परियोजनाओं का सरकारी विज्ञापन प्रात: कमल अखबार का प्रकाशन शुरू होने के समय से प्रकाशित हो रहा है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ब्रजेश के स्वामित्व वाले हिंदी दैनिक की 300 से अधिक प्रतियां प्रकाशित नहीं होती हैं, लेकिन प्रतिदिन इसके 60,862 प्रतियां बिक्री दिखाया गया था, जिसके आधार पर उसे बिहार सरकार से प्रति वर्ष करीब 30 लाख रुपये के विज्ञापन मिलते थे।

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