जेटली ने अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर दिया हैः यशवंत सिन्हा

नयी दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि वित्तीय कुप्रबंधन, नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लचर क्रियान्वयन ने भारतीय अर्थव्यवस्था का बेड़ागर्क कर दिया है और (वास्तविक) आर्थिक वृद्धि दर निचले स्तर पर पहुंच गयी है।
यशवंत सिन्हा ने बुधवार को एक अंग्रेजी दैनिक में लिखे एक आलेख में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधते हुए कहा है कि वह 24 घंटे लगातार काम करने के बावजूद अपने कार्य के प्रति न्याय करने में विफल रहे हैं। जेटली की योग्यता पर सवाल उठाते हुए उन्होेंने कहा कि वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी उन्हें वित्त मंत्री जैसी अहम जिम्मेदारी दी गयी है। वास्तव में आम चुनावों से पहले ही उन्हें वित्त मंत्री बनाया जाना तय था। जेटली ने अर्थव्यवस्था का ध्वस्त कर दिया है। उन्होेंने जेटली को उदारीकरण के बाद से अब तक का सबसे भाग्यशाली वित्त मंत्री बताते हुए कहा है कि उनके समय में कच्चे तेल के दाम गिरे। इसका लाभ उठाकर गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) पर नियंत्रण किया जा सकता था और रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता था। भाजपा नेता ने कहा है कि सरकार के आंकड़ों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की मौजूदा वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत है लेकिन वास्तव में यह 3.7 प्रतिशत है। मोदी सरकार ने वर्ष 2015 में जीडीपी की वृद्धि दर मापने के तरीकों में बदलाव किया है, जिससे आंकड़ा 5.7 प्रतिशत दिख रहा है। सिन्हा ने लिखा है कि निजी निवेश घट गया है। कृषि की स्थिति बहुत खराब है। विनिर्माण उद्योग में मंदी है और औद्योगिक उत्पादन गिर रहा है। सेवा क्षेत्र की बढ़ोत्तरी घटी है और निर्यात कम हुआ है। हर क्षेत्र की आर्थिक दशा खराब है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी आर्थिक आपदा साबित हुई है। जीएसटी को लागू करने का तरीका लचर रहा जिससे उद्योग और व्यापार जगत में उथल-पुथल मच गयी है। लोगों की नौकरियां खत्म हो गयी हैं और नए रोजगार नहीं मिल रहे हैं। नोटबंदी और उसके बाद जीएसटी के कारण हाल में आये जीडीपी के आंकड़े के अनुसार इसकी वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत है जो चीन से कम है। भाजपा नेता ने हाल में ही गठित आर्थिक सलाहकार परिषद के पांचों सदस्यों की तुलना पांच पांडव से की है, जो आर्थिक संकट से निकलने में मदद करेगी। मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के डॉ. सी रंगराजन के नेतृत्व वाली आर्थिक सलाहकार परिषद को भंग कर दिया था। सरकार ने पूर्व अर्थशास्त्री विवेक देवराय की अध्यक्षता में आर्थिक सलाहकार परिषद का गठन किया गया है। इस परिषद में रतन घाटल, रथिन रॉय, सुरजीत भल्ला और आशिमा गोयल को सदस्य बनाया गया है। सिन्हा ने कहा है कि लघु उद्योग क्षेत्र अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। इसको तत्काल राहत पैकेज की जरूरत है। सरकार बड़े वित्तीय संकट के कगार पर है। जीएसटी का इनपुट क्रेडिट का रिफंड 65 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि कुल कर संग्रह 95 हजार करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि मानसून अपेक्षा के अनुरूप नहीं होने से देश का आर्थिक संकट और बढ़ेगा। सिन्हा ने कहा कि देश में छापामारी की संस्कृति बढ़ रही है। नोटबंदी के बाद से इसमें भारी इजाफा हुआ है। आयकर विभाग और प्रवर्तन महानिदेशालय के पास लाखों मामले लंबित हैं, जिनमें करोड़ों लोगों का भविष्य दांव पर है। भाजपा नेता ने कहा कि अर्थव्यवस्था को बनाने में मेहनत लगती है, जबकि इसे आसानी से ध्वस्त किया जा सकता है।

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