जम्मू–कश्मीर में सरकार गिरी, भाजपा ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ा, ये रहे कारण

नई दिल्ली.भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी के साथ गठबंधन तोड़ लिया है। इससे महबूबा मुफ्ती की सरकार खतरे में आ गई है और इसके बाद मुख्यमंत्री महबूबा ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया। माना जा रहा है कि महबूबा चाहती थीं कि भले आतंकी गतिविधियां बढ़ें, रमजान की तरह सीजफायर जारी रहना चाहिए। लेकिन भाजपा इस पक्ष में नहीं थी और इसी कारण उसने सरकार से हटना ठीक समझा। इसका कारण यह भी रहा कि लगातार हो रही हिंसक और आतंकी घटनाओं के कारण शहीद हो रहे जवानों को लेकर देश में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

मंगलवार को भाजपा नेता राम माधव ने गठबंधन से हटने के निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि घाटी में आतंकवाद, कट्टरपंथ, हिंसा बढ़ रही है। लोगों के जीने का अधिकार और बोलने की आजादी भी खतरे में है। इसलिए पीडीपी के साथ सरकार चलाना मुश्किल है। हमने गठबंधन से अलग होने का फैसला लिया है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर के भाजपा नेताओं की दिल्ली में अहम बैठक हुई। माधव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”खास बैठक में जम्मू-कश्मीर के हालात पर चर्चा की गई। हमने 3 साल पहले भाजपा-पीडीपी गठबंधन की सरकार बनाई थी। इसका मकसद कितना पूरा हुआ, इस पर विचार हुआ। पिछले कुछ दिनों में कश्मीर में जो हालात हैं, उस पर भी चर्चा हुई। गृह मंत्रालय और एजेंसियों से सूचनाएं लेने के बाद हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी जी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से सलाह ली और उसके बाद यह निर्णय लिया गया।”

इससे पहले पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई थी, जिसमें विचार विमर्श करने के बाद पीडीपी सरकार से हटने का निर्णय लिया गया। राम माधव ने कहा कि ”प्रदेश के नेताओं और केंद्रीय नेताओं से चर्चा और सलाह के बाद हमने गठबंधन से हटने का फैसला किया है। तीन साल पहले जनादेश खंडित था। जम्मू में भाजपा को समर्थन था, कश्मीर घाटी में पीडीपी को बहुतायत में सीटें मिलीं। हमने 4 महीने की कवायद के बाद साझा सरकार चलाने का फैसला किया था। पिछले 3 साल से ज्यादा में भाजपा ने अच्छी तरह से सरकार चलाने, शांति बहाल करने और विकास को बढ़ाने के लिए पीडीपी का साथ दिया था। शुजात बुखारी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई, ये हालात की गंभीरता को बताता है। केंद्र सरकार के रोल की बात है, तो उसने 3 साल के दौरान राज्य सरकार की मदद के लिए हमेशा तत्पर रही।”

भाजपा ने पीडीपी से नाता क्यों तोड़ा, इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि इसके पीछे ये बड़े कारण रहे – 

  1. सेना के जवानों पर पत्थर बरसाने वाले छह हजार लोगों के खिलाफ पीडीपी की महबूबा सरकार ने केस वापस ले लिए, जिसके कारण पत्थरबाजों की हिम्मत और बढ़ गई। भाजपा इसके पक्ष में नहीं थी।
  2. रमजान के दौरान सीजफायर के लिए महबूबा ने केंद्र सरकार पर दबाव बनाया। इसके बाद वहां आतंकियों ने जमकर खून-खराबा किया और पत्रकार शुजात बुखारी जैसे बहादुर पत्रकार को मार डाला। ईद की छुट्टी मनाने के लिए सेना के जवान औरंगजेब को आतंकियों ने अपहरण कर मार डाला। आतंकी घटनाओं में बहुत वृद्धि हुई। इसके बाद भी महबूबा इसे बढ़ाना चाहती थी, लेकिन केंद्र ने सीजफायर बढ़ाने से साफ मना कर दिया। इससे दोनों के रिश्तों में खटास बढ़ गई।
  3. सीआरपीएफ की गाड़ी पर हमले के दौरान एक पत्थरबाज कुचलकर मारा गया। इस मामले में जम्मू कश्मीर सरकार के इशारे पर पुलिस ने सेना के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया, भाजपा इसके सख्त विरोध में थी।

 

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