चारा घोटालाः लालू समेत 31 आरोपियों पर फैसला अब 19 मार्च को

रांचीः चारा घोटाला से जुड़े दुमका ट्रेजरी मामले में सीबीआई कोर्ट का फैसला शनिवार को टल गया। कोर्ट अब इस मामले में अपना फैसला 19 मार्च को सुना सकती है।
इस मामले में बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और डॉ. जगन्नाथ मिश्र को मिलाकर 31 लोगों को आरोपी बनाया गया है। लालू के वकील ने बताया कि न्यायधीश ट्रेनिंग पर गए हैं। इसलिए फैसला निर्धारित तारीख तक के लिए टाल दिया गया।
इससे पहले कोर्ट ने सभी आरोपियों को सुनवाई के दौरान मौजूद रहने के लिए आदेश दिया था। इसके अलावा शुक्रवार को कोर्ट ने तत्कालीन अकाउंटेंट समेत तीन पूर्व अफसरों को समन जारी किया। गुरुवार को लालू की ओर से दाखिल नई याचिका में इन अधिकारियों को आरोपी बनाने की मांग की गई थी। बता दें कि लालू यादव पर चारा घोटाले के 6 मामले दर्ज हैं। तीन में उन्हें सजा सुनाई जा चुकी है। वे फिलहाल बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं।

इनको जारी हुआ समन
इस मामले में पूर्व अकाउंटेंट जनरल पीके मुखोपाध्याय, पूर्व डिप्टी अकाउंटेंट जनरल बीएन झा, महालेखाकार कार्यालय के पूर्व सीनियर अकाउंटेंट जनरल प्रमोद कुमार को समन जारी किया गया है। इस मामले में आरोपी बनाए जाने के पीछे कोर्ट का तर्क है कि पूर्व अकाउंटेंट जनरल पीके मुखोपाध्याय ने 1990 से 1995 के बीच ऑडिट रिपोर्ट भेजी थी। उसमें कहीं भी अवैध निकासी का जिक्र नहीं किया। साथ ही पशुपालन विभाग की ओर से बताया गया है कि अवैध निकासी 1990-95 के बीच नहीं हुई है।
ये है दुमका ट्रेजरी मामला
दुमका ट्रेजरी से दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच गैर-कानूनी तरीके से 3.76 करोड़ रुपए निकाले गए। इस मामले में सीबीआई ने 11 अप्रैल 1996 को 48 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। 11 मई 2000 को पहली चार्जशीट दायर की गई। जनवरी 1996 में करीब 950 करोड़ रुपए का चारा घोटाला पहली बार सामने आया था। इसके तहत 1990 के दशक में चारा सप्लाई के नाम पर सरकारी ट्रेजरी से ऐसी कंपनियों को फंड जारी हुआ, जो थी ही नहीं। घोटाला हुआ तब लालू बिहार के मुख्यमंत्री थे। उनके पास वित्त मंत्रालय भी था। आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की जांच के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 1996 तक अटकाए रखा। 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया।

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