आरटीआइ अधिनियम के तहत आया बीसीसीआइ बोर्ड

नईदिल्ली : अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) भी आरटीआइ के दायरे में आ गया। अब आप बोर्ड से भी पूछ सकते हैं सवाल। यह आदेश केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) ने दिया है। आदेश में कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) अब सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के अंतर्गत काम करेगा और इसकी धाराओं के अंतर्गत देश के लोगों के प्रति जवाबदेह होगा। आरटीआइ मामलों में शीर्ष अपीलीय संस्था सीआइसी ने इस निष्कर्ष को निकालने के लिए कानून, उच्चतम न्यायालय के आदेश, भारत के विधि आयोग की रिपोर्ट तथा युवा एवं खेल मामलों के मंत्रालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी की प्रस्तुतियों को देखा कि बीसीसीआइ की स्थिति, प्रकृति और काम करने की विशेषताएं आरटीआइ अधिनियम की धारा दो (एच) की जरूरी शर्तों को पूरा करती हैं। आयुक्त ने बीसीसीआइ को आदेश प्राप्त होने की तारीख के 10 दिन के भीतर इस मामले में अपीलकर्ता द्वारा मांगी गई बिंदुवार जानकारी देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, ‘किसी भी परिस्थिति में हितधारकों के बुनियादी मानवाधिकारों के किसी उल्लंघन के लिए बीसीसीआइ को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए था। उल्लंघन पर सवाल उठाने के लिए कोर्ट में सामान्य याचिका दायर करने के अलावा कोई प्रक्रिया नहीं है।’

 

15 दिन के अंदर ऑनलाइन ऑफलाइन तंत्र तैयार करना का दिया निर्देश

अधिनियम की धारा दो (एच) मानदंडों को परिभाषित करती है जिसके अंतर्गत आरटीआइ अधिनियम के तहत एक निकाय को सार्वजनिक प्राधिकरण के रूप में घोषित किया जा सकता है। सूचना आयुक्त श्रीधर आचायरुलू ने 37 पन्ने के आदेश में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी फिर से पुष्टि कर दी कि बीसीसीआइ देश में क्रिकेट प्रतियोगिताओं को आयोजित करने के लिए स्वीकृत राष्ट्रीय स्तर की संस्था है जिसके पास इसका लगभग एकाधिपत्य है। आचार्युलू ने कानून के अंतर्गत जरूरी केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी, केंद्रीय सहायक सार्वजनिक सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारियों के तौर पर योग्य अधिकारी नियुक्त करने के लिए अध्यक्ष, सचिव और प्रशासकों की समिति को निर्देश दिया है। उन्होंने आरटीआइ प्रावधान के अंतर्गत सूचना के आवेदन प्राप्त करने के लिए बीसीसीआइ को 15 दिन के अंदर ऑनलाइन और ऑफलाइन तंत्र तैयार करने के निर्देश दिए।

 

बीसीसीआइ नहीं बता पाई थी कि क्यों बोर्ड को नहीं लाया जा सकता आरटीआइ तहत

जुलाई में सीआइसी ने बीसीसीआइ और खेल मंत्रलय से यह बताने के लिए कहा था कि विभिन्न न्यायिक फैसलों और विधि आयोग की ताजा रिपोर्ट के मद्देनजर बीसीसीआइ को आरटीआइ अधिनियम के तहत क्यों नहीं लाया जा सकता? यह मसला उनके समक्ष तब आया जब खेल मंत्रालय आरटीआइ आवेदक गीता रानी को संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। गीता रानी ने उन प्रावधानों और निर्देशों की जानकारी मांगी थी जिनके तहत बीसीसीआइ भारत का प्रतिनिधित्व और देश की टीम का चयन करता है। आवेदक ने पूछा था कि बीसीसीआइ द्वारा चुने गए खिलाड़ी उसके लिए खेलते हैं या भारत के लिए और एक निजी संघ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कैसे कर सकता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए टीम चुनने का अधिकार बीसीसीआइ को देने में सरकार का क्या फायदा है? मंत्रालय ने कहा था कि उसके पास कोई जानकारी नहीं है क्योंकि बीसीसीआइ आरटीआइ अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है लिहाजा आरटीआइ आवेदन उसे नहीं दिया जा सकता।

 

आरटीआइ अधिनियम बीसीसीआइ के साथ सभी संवैधानिक सदस्य संघों पर भी लागू होगा

बीसीसीआइ ने सोमवार को कुछ और समय मांगा, लेकिन आचार्युलू ने उसकी मांग खारिज करते हुए कहा कि क्रिकेट बोर्ड को सीआइसी से नोटिस प्राप्त हुए, लेकिन वह ना तो सुनवाई की तारीखों पर प्रस्तुत हुआ और ना ही लिखित में कुछ दिखा। उन्होंने कहा, ‘जैसा कि कानून आयोग की रिपोर्ट में चर्चा की गई है, बीसीसीआइ को एनएसएफ (राष्ट्रीय खेल संघ) के रूप में आरटीआइ अधिनियम के तहत सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। आरटीआइ अधिनियम बीसीसीआइ के साथ उनके सभी संवैधानिक सदस्य संघों पर पर लागू होना चाहिए जो बीसीसीआइ के लिए लागू मानदंडों को पूरा करते हों।’

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