असम में 1.9 करोड़ लोग ही भारत के वैध नागरिक, बाकी संदेह के घेरे में

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का पहला मसौदा जारी, अन्य पर चल रहा काम
नई दिल्लीः असम में रविवार को रात्रि तक एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) का पहला मसौदा जारी किया गया। इसके तहत सिर्फ 1.9 करोड़ लोगों को ही भारत का वैध नागरिक माना गया है जबकि अन्य मसौदों में बाकी का नाम सत्यापन के लिए अभी भी प्रक्रिया में है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल शैलेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इसकी जानकारी दी और बताया क‌ि इस वर्ष तक ये मसौदे पूरी तरह से तैयार कर लिए जाएंगे।
बता दें कि असम में बांग्लादेशियों की बढ़ती जनसंख्या के संकट के मद्देनजर नागरिक सत्यापन के आवेदन लेने की प्रक्रिया वर्ष 2015 से शुरू की गई। असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या को देखते हुए यह प्रक्रिया वर्ष 2005 में कांग्रेस शासनकाल में शुरू हुई थी। भाजपा के सत्ता आने पर इसे हवा मिली। भाजपा के घोषणा पत्र में भी बांग्लादेशी घुसपैठियों के मसले का जिक्र था। फिलहाल 31 दिसंबर, 2017 को इसका पहला मसौदा प्रकाशित हो गया है, उम्मीद जताई जा रही है कि वर्ष 2018 में इसकी पूरी प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) में नाम शामिल कराने के लिए भारतीय नागरिकों को अभी मौका मिलेगा। जिनके नाम पहले ड्राफ्ट में नहीं आए हैं, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। इस मसौदे का उद्देश्य मूल रूप से यहां के निवासियों की खोज करना और अवैध रूप से रह रहे लोगों को खोज निकालना और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना है।

1951 में सर्वप्रथम तैयार किया गया था पहला एनआरसी
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी भारतीय नागरिकों के नाम वाला रजिस्टर है, जो केवल वर्ष 1951 में तैयार किया गया था, जो अब असम में अवैध प्रवासियों को ढूंढ निकालने के लिए अपडेट किया जा रहा है। संगठन ने सत्यापन के लिए कुल 3.2 9 करोड़ आवेदन प्राप्त किए थे और शेष नाम पूरी तरह से जांच के बाद बाहर हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार अगले मसौदे में जांच की पूरी प्रक्रिया खत्म होने के बाद ये नाम उजागर किए जाएंगे। अगले मसौदे का जिक्र करते हुए रजिस्ट्रार जनरल शैलेश कुमार ने कहा कि हम इसे सर्वोच्च न्यायालय में ले जाएंगे क्योंकि उन्होंने हमें निर्देशित किया है। इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय में पिछले तीन साल में 40 से ज्यादा सुनवाई हो चुकी हैं। अगले माह फरवरी में सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होनी है, जहां हम सम्माननीय अदालत के समक्ष सभी तथ्यों को रखेंगे और हमें प्राप्त होने वाले निर्देशों के आधार पर हम मसौदा प्रकाशित होने के बाद कोई फैसला लेंगे। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया दिसंबर 2013 में शुरू हुई और 2015 में असम राज्य के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। ऑनलाइन रिलीज हुए एनआरसी ऑनलाइन भी देखा जा सकता है। यहां आवेदक अपने आवेदन रसीद संख्या दर्ज करके उनके नाम की जांच कर सकते हैं।

एनआरसी प्रकाशन के दौरान राज्य में तैनात रहे 45 हजार सुरक्षाकर्मी
एनआरसी के प्रथम मसौदे के प्रकाशन के दौरान सेना के साथ लगभग 45 हजार सुरक्षाकर्मी राज्य में तैनात रहे। केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा पिछले सप्ताह दो दिनों तक राज्य में ही थे। उन्होंने इसकी तमाम तैयारियों का जायजा लिया था। 2005 के फैसले के बाद एनआरसी का प्रकाशन किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट खुद इसकी निगरानी कर रहा है। असम पहला राज्य है, जहां एनआरसी को पहले 1951 में तैयार किया गया था और अब फिर से तैयार किया जा रहा है।

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