अब दिल्‍ली से उत्तर प्रदेश का सफर महज 45 मिनट में…

प्रधानमंत्री ने किया देश के पहले 14 लेन एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन

नई दिल्लीः राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के विकास को गति देने वाली महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार सुबह उद्घाटन कर दिया है। इससे दिल्ली और उत्तर प्रदेश की दूरी और कम हो जाएगी। यह देश का पहला 14 लेन का एक्सप्रेस-वे है। पीएम मोदी ने फिलहाल दिल्ली खंड का उद्घाटन किया है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के मॉडल को भी देखा। उद्घाटन के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे।
किया रोड शो
पीएम मोदी ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करने के तुरंत बाद जीप पर सवार होकर रोड शो किया। वहीं, रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नितिन गडकरी भी दूसरी जीप में थे। रोड शो के दौरान सड़क के दोनों ओर प्रशंसक और भाजपा कार्यकर्ता खड़े थे और मोदी-मोदी का नारा लगा रहे थे। रोड शो के दौरान सड़क के दोनों ओर प्रशंसक और भाजपा कार्यकर्ता खड़े थे और मोदी-मोदी का नारा लगा रहे थे।
सड़क के किनारे 40,000 पौधे
देश के सबसे चौड़े इस एक्सप्रेस-वे पर बीच में 6 लेन का एक्सप्रेस वे है और दोनों तरफ 4 लेन के हाईवे होंगे, ताकि शहर के ट्रैफिक को बाहर से आने जाने वाले ट्रैफिक से अलग किया जा सके। इस एक्सप्रेस वे का पहला चरण करीब नौ किलोमीटर का है, जिसमें यमुना पुल पर वर्टिकल गार्डेन और सड़कों पर सोलर लाइट भी लगी हैं। सड़क के किनारे 40,000 पौधे भी लगाए जा रहे हैं।
कुछ ऐसा है दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे
– कुल लंबाई 90 किलोमीटर
– निर्माण पर लागत तकरीबन 800 करोड़
– दिल्ली से मेरठ 3 घंटे का सफर अब सिर्फ 45 मिनट में
– सोलर पावर से लैस देश का पहला हाइवे
– 14 लेन का देश का पहले एक्सप्रेस-वे
– 8 सोलर प्लांट, 4 हजार किलो वॉट बिजली उत्पादन होगा
– हर 500 मीटर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
– यमुना ब्रिज पर दोनों ओर सोलर सिस्टम
– दोनों ओर 2.5 मीटर चौड़ा साइकिल ट्रैक
– दोनों ओर 1.5 मीटर चौड़ा पैदल यात्री ट्रैक
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद पांच नवंबर 2015 को इस परियोजना के लिए आधारशिला रखी थी। 18 महीने के रिकॉर्ड समय में दिल्ली खंड का निर्माण हुआ है। 842 करोड़ रुपये की लागत से वाला यह देश का पहला राजमार्ग है जहां सौर बिजली से सड़क रोशन होगी। इसके अलावा प्रत्येक 500 मीटर पर दोनों तरफ वर्षा जल संचयन की व्यवस्था होगी। साथ ही इसमें 36 राष्ट्रीय स्मारकों को प्रदर्शित किया जाएगा तथा 40 झरने होंगे। इस एक्सप्रेस वे पर 8 सौर संयंत्र हैं जिनकी क्षमता 4 मेगावाट है।

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