ट्रेनी महिला सिपाही की मौत के बाद 175 सिपाही बर्खास्त, 23 निंलबित

पटना : राजधानी में एक ट्रेनी महिला सिपाही की मौत के बाद पटना पुलिस में हुये विद्रोह और हिंसक वारदात में पटना जोनल आईजी नैय्यर हसनैन खां ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रविवार को 175 पुलिसकर्मियों को सेवा बर्खास्त कर दिया। इनमें 77 महिलाओं समेत 167 ट्रेनी शामिल है। विभाग के 23 कर्मचारियों को निलंबित भी किया गया है। बताया जा रहा है कि राज्य में इस महकमे में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है।


खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी
नैयर ने बताया कि इस मामले में कुल चार एफआईआर दर्ज की गईं। जो दोषी पाए जाएंगे, उनकी गिरफ्तारी भी होगी। छुट्टी नहीं दिए जाने के कारण बीमार महिला सिपाही सविता पाठक की मौत होने के आरोप के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पाया गया कि पूर्व में उसे चिकित्सा अवकाश दिया गया था। उसके काम पर लौटने के बाद ड्यूटी लगाए जाने पर गत 30 अक्टूबर को उसने तबियत ठीक न होने की बात कही थी, पर उसकी ड्यूटी लगा दी गई। इस मामले में जवाबदेह ट्रैफिक पुलिस के एक हवलदार और दो सिपाहियों को निलंबित किया गया है, जो 23 निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में शामिल हैं। नैयर ने कहा कि पुलिस लाइन में मौजूद अस्पताल में पदस्थापित मेडिकल ऑफिसर द्वारा उक्त बीमार महिला सिपाही के स्वास्थ्य की जांच नहीं किए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।

बदला लेने के उद्देश्य से सिपाहियों को उकसाया
पुलिस लाइन में तैनात पुलिस उपाधीक्षक मसलेहुद्दीन पर बीमार महिला सिपाही को छुट्टी नहीं दिए जाने के आरोप के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जांच में उनके खिलाफ कोई आरोप सामने नहीं आया है। ऐसा लगता है पुलिस संघ के लोग जिनके खिलाफ पूर्व में कार्रवाई हुई थी, ने बदला लेने के उद्देश्य से सिपाहियों को उकसाया होगा। मसलेहुद्दीन ने भी स्वयं एफआईआर दर्ज कराई है। उपद्रवी सिपाहियों ने मसलेहुद्दीन की बुरी तरह पिटाई कर दी थी तथा उनके आवास के भीतर घुसकर तोड़फोड़ और उनके परिवार के साथ दुर्व्यवहार किया था। नैयर ने कहा कि कुछ और बिंदुओं पर जांच जारी है तथा सोमवार को वह पुलिस मुख्यालय को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे।

पुलिसकर्मियों ने अधिकारियों को खदेड़ा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गुस्साए पुलिसकर्मियों ने नगर पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक और सार्जेंट मेजर की भी पिटाई की। लाठी और डंडे से लैस पुलिसकर्मियों ने अधिकारियों को खदेड़ दिया और गाड़ियों को तोड़ डाला। इस दौरान मीडियाकर्मियों को भी निशाना बनाया गया। इसके बाद आक्रोशित पुलिसकर्मी सड़क पर उतर गए और हंगामा किया। आम लोग जब आक्रोशित हुए तब सभी पुलिसकर्मी पुलिस लाइन में लौट गए। इस दौरान दोनों ओर से पथराव हुआ। आक्रोशित पुलिसकर्मियों का आरोप था कि उन्हें छुट्टी तक नहीं दी जाती है। मृतका का भी छुट्टी न मिलने के कारण सही ढंग से इलाज नहीं हो पाया, जिससे उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद बाद में एसएसपी मनु महाराज ने इस मामले के दोषी लोगों पर कार्रवाई कराने की बात कही और फिर एक जांच कमिटी को दोषियों का पता लगाने और मामले की तफ्तीश करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद इस कमिटी ने रविवार को 170 से अधिक पुलिसकर्मियों को मामले में दोषी बताया, जिसके बाद रविवार को इन सभी पर कार्रवाई की गई।


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