केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे रांची, किया नक्सल विरोधी अभियान की समीक्षा

राजनाथ अपने ससुराल बेलवाटिका में अपनी सास के श्राद्धकर्म में शामिल होने के लिए पलामू जाएंगे

प्रत्येक वर्ष मिलने वाली राशि धरातल तक कैसे पहुंचेगी पर दिया सुझाव

रांचीः केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को रांची पहुंचे। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वे सीधे धुर्वा स्थित झारखंड मंत्रालय पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके कई मंत्रियों समेत भाजपा नेताओं ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। झारखंड मंत्रालय में पहुंचने के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह झारखंड के अफसरों के साथ नक्सल विरोधी अभियान की समीक्षा की। गृह मंत्री केंद्र से नक्सल प्रभावित झारखंड के 16 जिलों को प्रत्येक वर्ष मिलने वाली 28.57 करोड़ की यह राशि पिछड़ों तक कैसे पहुंचेगी, इसके लिए उन्होंने सुझाव भी दी। यह राशि पहले भी मिलती थी, लेकिन विकास धरातल पर नहीं दिखता था। उक्त राशि के सदुपयोग पर भी मंथन हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रघुनाथ दास ने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर राज्य सुरक्षा बलों ने करीब सवा तीन साल में बेहतरीन काम किया है। आगे कहा- अभी झारखंड में कुछ अपराधी गुट मुखौटा ओढ़कर वारदात कर रहे हैं, जल्द ही उन्हें भी समाप्त कर दिया जायेगा। नक्सल समस्या समाप्त करने में झारखंड सबसे पहला राज्य होगा, इस ध्येय के साथ हम काम कर रहे हैं।

इस बैठक में चतरा, गढ़वा, लातेहार, हजारीबाग, रांची व खूंटी जिले के डीसी और एसपी भी शमिल थे। बैठक के बाद वह अपने ससुराल बेलवाटिका में अपनी सास के श्राद्धकर्म में शामिल होने के लिए पलामू चले गए। वहां से पुन: रांची से वो 5 बजे शाम दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।

गरीबों का विकास देखना नहीं चाहते माओवादीः इस दौरान राजनाथ सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि राज्य सरकार एंटी नक्सल मुहीम में काफी बेहतर काम कर रही है। सरकार विकास को आगे बढ़ाकर माओवादियों से लड़ना चाहती है। पर माओवादी गरीबों का विकास नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा-पिछड़े क्षेत्रों में विकास के लिए राज्य सरकार को जो भी केंद्रीय मदद की आवश्यकता होगी, वो जरूर दी जाएगी। सरकार पिछड़े क्षेत्रों में विकास कर माओवादियों का सफाया करना चाहती है। जबकि माओवादी गरीब विरोधी है और वो विकास में रोड़े उत्पन्न कर रहे हैं। वो नहीं चाहते कि गरीबों को सुविधा मिले।

माओवादी का उद्देश्य केवल रंगदारी रह गई हैः राजनाथ सिंह ने कहा- माओवादियों का उद्देश्य केवल रंगदारी वसूलना रह गया है। माओवादियों के बड़े नेता करोड़पति बन गए हैं। उनके बच्चे अच्छे-अच्छे संस्थानों व विदेशों तक में पढ़ रहे हैं। जबकि गरीबी और भुखमरी के चंगुल में फंसे आदिवासियों की हालत का खराब है। गरीबों का ये विकास देखना नहीं चाहते हैं। अगर माओवादी हथियार छोड़ बात करें तो सरकार भी बात करने को तैयार है। उन्होंने कहा-पिछले 4 सालों में नॉर्थ ईस्ट में नक्सली हिंसा 1 हजार से नीचे पहुंच गई है। 75% घटनाएं कम हो गई है।

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