सिर्फ चालू खाते से हटाई नकदी निकासी सीमा

‘सूट-बूट वाली सरकार’ ने आम आदमी के बचत खाते की सीमा पर नहीं दी कोई राहत

मुम्बई/ नई दिल्ली/ कोलकाताः ‘सूट-बूट वाली सरकार’ कहलाने वाली केंद्र सरकार ने नोटबंदी के 80 दिन बाद सोमवार को बैंक खातों से नकदी निकासी पर पहली बार बड़ी छूट दी। इस छूट के तहत 1 फरवरी से चालू खातों से नकदी निकासी की सीमा हटा ली गई है। लेकिन इस निर्णय का लाभ केवल व्यापारी वर्ग को ही होगा, क्योंकि आम आदमी बचत खाते का उपयोग करता है और उस पर निकासी की साप्ताहिक सीमा में कोई राहत नहीं दी गई है। आम जनता और राजनीतिक दलों ने सरकार के इस फैसले की निंदा करते हुए इसे सिर्फ पैसे वालों के फायदे के लिए लिया गया निर्णय बताया है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा के समय कहा था िक 50 दिन की परेशानी है, उसके बाद सब सामान्य हो जाएगा, लेकिन 80 दिन गुजरने के बाद भी बचत खातों पर स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है।
नोटबंदी के बाद सोमवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने चालू खातों से नकद निकासी की 1 लाख रुपए की सीमा हटा दी। केंद्रीय बैंक के इस निर्णय में आम आदमी को राहत के नाम पर मात्र इतना किया गया है कि 1 फरवरी से एटीएम से प्रतिदिन 10 हजार की नकद निकासी की सीमा को हटा लिया गया, लेकिन इसका लाभ इसलिए नहीं मिल पाएगा क्योंकि एक सप्ताह में 24 हजार रुपये से अधिक की निकासी अब भी संभव नहीं होगी।

अपने ही पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं आम लोग

सोमवार को आरबीआई की एक और घोषणा से जहां कारोबारियों में खुशी है, वहीं आम जनता निराश है। आम जनता का कहना है कि पहले सप्ताह में 24 हजार रुपये तो एैसे भी निकाल पाते थे और यह नियम ही है कि 20 हजार से अधिक रुपये बचत खाते से नहीं निकाल सकते। इससे सरकार की मंशा साफ झलक रही है। ऐसा लग रहा है कि यह सरकार पूंजीपतियों की है, आम जनता की नहीं।

निकासी पर लगे सभी प्रतिबंध हटे – डेरेक

नकदी की निकासी पर लगे प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने पर एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस ने नाराजगी जतायी है। पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता डेरेक ओब्रायन ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि केंद्र सरकार इस तरह झटके न दे और एक बार में ही रुपयों की निकासी पर लगे प्रतिबंधों को हटाए।

पूंजीपतियों की है बल्ले-बल्ले – सलीम

आरबीआई की घोषणा को लेकर माकपा के वरिष्ठ नेता व सांसद मो. सलीम ने कहा कि नोटबंदी से शुरू से ही अमीरों की बल्ले – बल्ले हुई और गरीबों को नुकसान हुआ। गरीबों की परेशानी दिन गुजरने के साथ – साथ अधिक उजागर होते जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की बदनीयती थी। उन्होंने कहा कि अपने ही रुपये निकालने का अधिकार लोगों से छीन लिया गया है और उस पर भी आरबीआई द्वारा हर रोज नियम बदले जा रहे हैं। हम जितना चाहे, उतना रुपया निकाल सकते हैं। यह लोगों का अधिकार है, लेकिन आरबीआई की घोषणा ने लोगों को काफी हद तक परेशान किया है।

केंद्र कालाबाजारियों के साथ – प्रदीप

इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सांसद प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से कई बार आरबीआई को पत्र दिये जाने के बाद आरबीआई की ओर से चालू खाते से प्रतिबंध हटाया गया है। उन्होंने कहा कि आरबीआई को ऐसा गवर्नर आज तक नहीं मिला था जिनकी समझ में यह नहीं आ रहा कि 5 राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और उम्मीदवार सप्ताह में केवल 24 हजार रुपये निकालकर अपना चुनावी खर्च वहन नहीं कर सकते। प्रदीप ने कहा कि शुरुआत से ही केंद्र सरकार कालाबाजारियों का साथ देती आयी है और आम लोगों के खिलाफ कदम उठाती आयी है। केंद्र सरकार के नोटबंदी के कदम से भी कालाबाजारी खुश और आम जनता निराश है।

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