भाजपा के मंत्री, सांसद, विधायक अपने खातों का ब्यौरा देंः मोदी

9 नवंबर से पहले के लेनदेन का ब्यौरा मांगें मोदी : विपक्ष, कांग्रेस ने कहा : फिफ्टी-फिफ्टी पीएम हैं मोदी

नयी दिल्ली (दिल्ली ब्यूरो व एजेंसियां) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के सभी सांसदों, मंत्रियों और विधायकों से कहा कि वे नोटबंदी की घोषणा के दिन 8 नवंबर से 31 दिसंबर के बीच के अपने बैंक खातों के स्टेटमेंट पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के पास जमा करायें। दूसरी ओर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री के इस निर्देश को ‘पाखंड’ बताते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों को नौ नवंबर से पहले किये गये लेनदेन का भी खुलासा करना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि नोटबंदी से पहले इसकी जानकारी होने के कारण उन्होंने कितने काले धन को सफेद किया।

मोदी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संसदीय दल की बैठक में यह भी कहा कि वे देश को काले धन के बोझ तले नहीं दबने देंगे। यह बयान विपक्ष के इन आरोपों की पृष्ठभूमि में आया है कि बड़े नोट बंद करने का फैसला राजनीति से प्रेरित था। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में शुचिता की अपनी प्रतिबद्धता को भी इस बयान से रेखांकित करने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री ने 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपये के नोटों को अमान्य करने के फैसले की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री ने इस आलोचना को भी खारिज कर दिया कि आयकर संशोधन विधेयक से काला धन रखने वालों को इसे सफेद बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि नये प्रावधान गरीबों से लूटे गये धन को उनके कल्याण के लिए लगाने में मददगार होंगे। लोकसभा ने मंगलवार को ही बाद में इस विधेयक को पारित कर दिया। मोदी का हवाला देते हुए संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा कि यह विधेयक काले धन के खिलाफ सरकार की जंग का हिस्सा है। गरीब कल्याण योजना का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार इस योजना के तहत एकत्र करराशि को गरीबों को बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति करने, स्वास्थ्य सुविधाओंं, शिक्षा, पेयजल आदि मुहैया कराने के लिए खर्च करेगी।

मोदी ने कहा कि सरकार भारत को नकदीरहित समाज बनाने के लिए प्रत्यनशील है। उन्होंने डिजिटल, मोबाइल अर्थव्यवस्था बनाने के उनके प्रयासों को सभी से समर्थन देने का आग्रह किया। बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने बैठक में मोबाइल और इंटरनेट से धन के लेनदेन पर प्रस्तुतीकरण दिया। संसद में जारी गतिरोध के बारे में पूछे जाने पर अनंत कुमार ने कहा कि सरकार शीतकालीन सत्र के पहले दिन से ही चर्चा को तैयार है और अगर विपक्ष चाहेगा तो प्रधानमंत्री दोनों सदनों में चर्चा में हस्तक्षेप को तैयार हैं। गौरतलब है कि लोकसभा में विपक्ष मतविभाजन के प्रावधान वाले नियम 56 के तहत चर्चा कराने की मांग कर रहा है जबकि सरकार को यह स्वीकार नहीं है और वह नियम 193 के तहत चर्चा पर जोर दे रही है।

दूसरी ओर कांग्रेस, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) -माकपा- और आम आदमी पार्टी (आप) ने मोदी के निर्देश को ‘पाखंड’ करार देते हुए पर मांग की कि भाजपा सदस्यों को नौ नवंबर से पहले किये गये लेनदेन का भी खुलासा करना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि नोटबंदी से पहले इसकी जानकारी होने के कारण उन्होंने कितने काले धन को सफेद किया। कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला और लोकसभा में माकपा के उपनेता मोहम्मद सलीम तथा आप पार्टी के प्रमुख एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को मोदी के इस निर्देश पर तीखा प्रहार करते हुए यह सवाल खड़ा किया और इस लेनदेन की संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) से जांच कराने की भी मांग की। सुरजेवाला ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि भाजपा ने नोटबंदी से ऐन पहले ओडिशा के 18 जिलों में संपत्ति की खरीद और बिहार में आठ सौदों के जरिये काले धन को सफेद करने का काम किया। इससे जाहिर होता है कि उसके नेताओं को पहले से नोटबंदी की जानकारी थी। उन्होंने कहा कि भाजपा को पिछले बारह महीने में अपने करोड़ों एकत्र के ह्मोत का हिसाब देना चाहिए।

सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री काला धन धारकों को नये नये तरीके से संरक्षण दे रहे हैं और वे पहले फिफ्टी फिफ्टी प्रधानमंत्री हो गये हैं। वास्तव में उनकी गरीब कल्याण योजना का असली नाम यह नहीं है बल्कि काला धन धारक योजना है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रधानमंत्री काले धन पर रोक लगाने के लिए इतने चिंतित थे तो उन्होंने विदेशों में धन भेजने की सीमा को 25 हजार डालर से बढ़ाकर दो लाख डालर क्यों किया। उन्होंने कहा कि किसी भी विधेयक में संशोधन करने से पहले उसे स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है लेकिन संसदीय इतिहास में मंगलवार को पहली बार ऐसा हुआ है कि संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए भेजे बिना और उस पर चर्चा कराये बिना ही पारित करा दिया गया। इस तरह से संसदीय नियमों की धज्जियां उड़ायी गयी। एजेंसियां

 

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