जाति, धर्म, नस्ल के आधार पर वोट मांगने से रद्द हो सकता है चुनाव

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कठोरता से लागू करने का चुनाव आयोग का निर्देश

नयी दिल्ली : चुनाव आयोग ने जाति, धर्म, नस्ल और भाषा के आधार पर चुनाव में वोट मांगने पर रोक लगाने सम्बन्धी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कठोरता से लागू करने के लिए सभी राज्यों को निर्देश जारी कर कहा है कि यदि कोई उम्मीदवार या उसका एजेंट आदि इस आधार पर वोट मांगता है तो यह चुनाव की आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होगा। आयोग ने मंगलवार को यहां जारी अपने इस आदेश को देश भर के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को भी भेजा है और न्यायालय के इस फैसले का पालन करने को कहा है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 2 जनवरी के फैसले के संदर्भ में कहा है कि अगर कोई उम्मीदवार, एजेंट या उसकी ओर से कोई अन्य व्यक्ति चुनाव में धर्म, जाति, भाषा, समुदाय और नस्ल के आधार पर वोट मांगता है तो यह जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 के तहत गैर कानूनी और कदाचार माना जायेगा तथा इसके आधार पर चुनाव रद्द भी किया जा सकता है।
आयोग ने कहा है कि  सुप्रीम   कोर्ट के उपरोक्त फैसले का गहन अध्ययन करने के बाद उसका मानना है कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 के उपनियम 3 और तीन-ए को तथा भारतीय दंड संंहिता की धारा 153-ए को साथ -साथ पढ़ा जाये और उसके आधार पर चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को बनाये रखने के लिए इसे लागू किया जाये। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ध्यान में रखते हुए इसका कड़ाई से पालन करें। आयोग ने राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले एवं निर्देश का संज्ञान लें और अगर कोई व्यक्ति, उम्मीदवार या एजेंट ऐसा करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करें। आयोग ने यह भी कहा है कि उसके इस निर्देश की जानकारी सभी जिला चुनाव अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों तथा चुनाव पर्यवेक्षकों को भी दी जाय। साथ ही सभी पंजीकृत और गैर पंजीकृत राजनीतिक दलों को भी इससे अवगत कराया जाय।

चुनाव प्रबंधन के लिए चार देशों से करार

चुनाव आयोग ने चुनाव प्रणाली तथा प्रबंधन के गुरों को साझा करने के लिए चार देशों के साथ एक करार किया है जिससे ये देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत की सफल चुनाव प्रक्रिया से सीख ले सकेंगे। आयोग ने मंगलवार को यहां एक समारोह में आस्ट्रेलिया, नेपाल, फिजी और बोस्निया हर्जेगोविना के साथ करार पर हस्ताक्षर किये।

चुनाव के पोस्टरों में राष्ट्रपति की तस्वीरें नहीं हों

कांग्रेस द्वारा पिछले दिनों एक चुनाव होर्डिंग पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की तस्वीर का इस्तेमाल किए जाने के बाद निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को कहा कि चुनावी मकसदों के लिए संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्हें किसी एक विशेष राजनीतिक दल के साथ नहीं जोड़ा जा सकता।आयोग ने कहा, ‘यहां यह जिक्र करना उपयुक्त है कि हमारे संविधान के अनुसार राष्ट्रपति संविधान का संरक्षक होता है और वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक मामलों में पूरी तरह से तटस्थ होता है, इसलिए यह आवश्यक है कि राजनीतिक दल और नेता अपनी राजनीतिक मुहिम में भारत के राष्ट्रपति का कोई भी जिक्र करते समय अत्यंत सावधानी बरतें।  उसने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति एवं राज्यों के राज्यपालों की फोटो को राजनीतिक दल एवं उम्मीदवार चुनाव संबंधी विज्ञापन, प्रचार मुहिम के दौरान किसी भी तरह इस्तेमाल नहीं करें।

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