हैप्पी बर्थडे संस्कारी बाबूजी…

नई दिल्लीः छोटे और बड़े पर्दे के बाबूजी यानी अभिनेता आलोक नाथ आज अपना जन्मदिन मना रहें है। आज बाबूजी ने अपनी जिंदगी के 62 बंसत पूरे कर लिए हैं। आलोक नाथ का जन्म 10 जुलाई 1956 को दिल्ली में हुआ था। इन्होंने अपने करियर में लगभग 140 फिल्में और 17 टीवी सीरियल्स किए, जिसमें से उनके ज्यादातर किरदार ‘बाबूजी’ के थे। आलोक नाथ की फिल्म ‘गांधी’, ‘मैंने प्यार किया’, ‘ताल’, ‘हम आपके हैं कौन’, ‘विवाह’, ‘कयामत से कयामत तक’, ‘हम साथ साथ हैं’ को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। टि्वटर पर आलोकनाथ के चर्चे होने की वजह सिर्फ उनके द्वारा निभाए गए संस्कारो भरे किरदार है। बाबूजी ने छोटे पर्दे से लेकर बड़े पर्दे तक बाबूजी की भूमिका निभाई है। वे मुख्य रूप से एक आदर्श पिता की भूमिका में देखे गए। आज भले ही उन्हें उनकी ‘बेस्ट बाबूजी’ वाली छवि से पहचाना जाता हो लेकिन वह अपने करियर में रिस्क लेने से कभी पीछे नहीं हटे।

यहां से की पढ़ाई
आलोक नाथ के पिता एक डॉक्टर थे और मां गृहवधू थीं। आलोक नाथ के पिता यही चाहते थे कि उनकी तरह ही वो भी एक डॉक्टर बने। आलोक नाथ ने अपनी स्कूलिंग और स्नातक की पढ़ाई दिल्ली से ही की। कॉलेज के दिनों में एक्टिंग में रुझान होने की वजह से वह कॉलेज के रुचिका थिएटर ग्रुप से जुड़े। इसके बाद उन्होंने तीन साल तक नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में पढ़ाई की, जहां उन्होंने एक्टिंग के गुर सीखे।
करियर की शुरुआत
1980 में कॉस्टिंग डायरेक्टर डॉली ठाकुर की फिल्म ‘गांधी’ में एक छोटे से किरदार की तलाश में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा गयीं थीं, जहां कई लोगों का ऑडिशन लेने के बाद उन्होंने आलोक नाथ को चुना। इस फिल्म के लिए उन्होंने आलोक नाथ को 20,000 रुपये दिए थे। यहीं से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ।
ऐसा रहा सफर
‘गांधी’ के बाद आलोक नाथ मुंबई आ गए। लेकिन, यहां की राहें उनके लिए आसान नहीं थीं। दूसरी फिल्म के लिए उन्हें 5 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने 2 साल तक पृथ्वी थिएटर में नादिरा बब्बर के साथ अभिनय किया। इसी दौरान आलोक नाथ को ‘मशाल’ में एक छोटे से रोल के लिए ऑफर आया, जिसको उन्होंने स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्हें छोटे, छोटे रोल मिलते रहे। 1988 में फ़िल्म ‘कयामत से कयामत तक’ आते-आते आलोकनाथ ने अपनी एक अलग पहचान बना ली थी।
हमेशा से नहीं थे संस्कारी
आज एक संस्कारी बापू के रूप में अपनी पहचान बना चुके आलोक नाथ अपने करियर के शुरुआत में हीरो भी रहे हैं। लेकिन, 1987 में ‘कामाग्नि’ में आलोकनाथ बहुत रोमांटिक और हॉट सींस करते भी नजर आए थे। आलोकनाथ ‘विनाशक’, ‘षड्यंत्र’ और ‘बोल राधा बोल’ जैसी कई फिल्मों में विलेन के रोल में भी नजर आ चुके हैं।
नहीं निभाया जीतेंद्र के पिता का किरदार
आलोक नाथ ने भले ही 140 फिल्मों में से 95 प्रतिशत फिल्मों में ‘बाबूजी’ का किरदार निभाया है। लेकिन, क्या आप जानते हैं एक बार उन्होंने पिता बनने से इंकार कर दिया था- उन्हें जीतेंद्र के पिता बनने का ऑफर मिला था। स्ट्रगल के दौरान उनकी मुलाकात नीना गुप्ता से हुई और जल्दी ही उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई।क्यों एक-दूसरे से अलग हुए आलोक-नीना…
नीना के साथ अफेयर
आलोक और नीना के अफेयर और ब्रेकअप के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन कहा जाता है कि दोनों ही अपने करियर पर ध्यान देना चाहते थे। इसलिए उन्होंने ब्रेकअप करने का फैसला लिया। नीना और आलोक ने साथ में ‘गांधी’ (1982) और ‘अंत’ (1994) में साथ काम किया है। ब्रेक के बाद नीना का अफेयर म्यूजिशियन शारंगदेव और वेस्ट इंडीज के क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स से भी रहा। बात आलोकनाथ की करें तो उन्होंने अपने घरवालों की पसंद की बिहारी लड़की अंशु सिंह से शादी की। 1990 में आलोकनाथ फिल्म ‘अग्निपथ’ में अमिताभ बच्चन के पिता के रोल में दिखाई दिए थे। उस वक्त आलोक की उम्र 34 साल थी और अमिताभ 48 साल के थे।  हालांकि, इसके एक साल पहले यानी 1989 में राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ में वे भाग्यश्री के बाबूजी का रोल कर पॉपुलर हो चुके थे। बाद में राजश्री की ज्यादातर फिल्मों में वे बाबूजी की भूमिका में ही दिखाई दिए।

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