सेलीब्रेशन के बाद सेहत भी संभालें

त्योहारों की तैयारी में शॉपिंग, सफाई और सैलीब्रेशन की व्यस्त शेड्यूल के बाद आपको भी डिटॉक्स की दरकार होती है। कई दिनों से बदले रूटीन को फिर से आम दिनचर्या तक लाने के लिए ख़ासतौर पर कोशिश पड़ती है। इन दिनों की थकान और अनियमित खानपान से मन और शरीर दोनों पर असर पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि पकवान बनाने, खाने, घर सजाने, रिश्ते निभाने और दोस्तों-रिश्तेदारों के यहाँ दावतों का लुत्फ़ उठाने के बाद खुद अपनी भी सुध ली जाए। अपने रूटीन में कुछ छोटे-छोटे बदलाव कर आप त्योहार के बाद डिटॉक्स शेड्यूल को अपना सकती हैं।

खान पान में बदलाव – कई दिन तक चलने वाले त्योहारों की रौनक में खान-पान पर बहुत ज्यादा असर पड़ता है। ऐसा होना लाजिमी भी है क्योंकि साल में एक बार ही ऐसा मौका आता है लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि इस बदलाव से होने वाले नुकसान को लेकर सचेत रहा जाय। त्योहारों में जमकर मिठाइयों का आनन्द उठाया जाता है। शॉपिंग भी भागदौड़ में जंक फूड भी खाया जाता है। एक्सरसाइज करना छूट जाता है। इसलिए दिवाली के बाद जब यह त्योहारी शृंखला खत्म होती है तो यह सोचना जरूरी हो जाता है कि शरीर को वापस बैलेंस में लाया जाय। ऐसे में शरीर को डिटॉक्सिफाई करके ही वापस अपने नियमित रूटीन को अपनाया जा सकता है। कई बार खान-पान में हुई इस लापरवाही के अपराधबोध के कारण क्रैश डाइट जैसे तरीके भी अपनाये जाते हैं। लेकिन यह गलत भी हैं और सेहत के लिए नुकसानदेह भी । संतुलित आहार और उचित कसरत ही इस अनियमितता से बाहर आने का सही उपाय है। इसके लिए अपने खानपान में मौसमी फलों ओर सब्जियों को शामिल करें। खूब पानी पीयें। जूस, पानी या सूप को डाइट का जरूरी हिस्सा बनाएं। कुछ दिनों तक ऐसी चीजें खाना बिलकुल टाल दें जिनमें, नमक, शक्कर या तेल ज्यादा मात्रा में हो। शरीर को डिटॉक्स करने के लिए इन चीज़ों से दूरी और भरपूर मात्रा में लिक्विड का सेवन करने से बेहतर कुछ भी नहीं।

एक्सरसाइज शुरू करें – त्योहारों के समय महिलाओं का रूटीन थकाने वाला जरूर होता है पर इन दिनों कसरत, रनिंग, योग और वाकिंग जैसी नियमित एक्टिविटीज का छूट जाना सेहत के लिए सही नहीं है। इसीलिए त्योहार की खुशियों और अपनेपन से मिली ऊर्जा को समेटते हुए फिर से एक्टिव दिनचर्या अपनाएं। रनिंग और वाकिंग करें। अपने वर्कआउट का समय भी थोड़ा सा और बढ़ाएं। आमतौर पर त्योहारों के दौरान सामान्य से ज्यादा कैलोरीज शरीर में पहुँचती हैं। ऐसे में आपको कसरत का समय बढ़ाकर ज्यादा कैलोरी खर्च करने की भी जरूरत होती है। ज्यादा कैलोरी वाली चीजें और तले हुए स्नैक्स के कारण फेस्टिव सीजन में अतिरिक्त फैट शरीर में जमा हो जाता है । ऐसे मौकों पर नई-नई डिशेज बनती हैं। जिसके चलते इन गिनती के दिनों में ही ज्यादा तला-भुना खाने पर खान-पान का सारा शेड्यूल बिगड़ जाता है। नतीजतन सेहत पर कई तरह से असर पड़ता है । यहाँ तक कि नींद भी कम हो जाती है। अलग सा तनाव और थकान घेर लेती है। जिसका असर घर-बाहर दोनों ही जगह के शेड्यूल पर पड़ता है। यही वजह है कि त्योहार के बाद खुद को डिटॉक्स करना जरूरी है। ताकि घर और काम के बीच संतुलन बना रहे। सेहत पर नकारात्मक असर ना पड़े। डिटॉक्स की इस कड़ी में नियमित एक्सरसाइज शुरू करना एक अहम् कदम है ।

सेहत की अनदेखी ना हो – सेहत से जुड़ी किसी ख़ास समस्या से पहले से पीडि़त हैं या इस थकाने वाले शेड्यूल के बाद कोई स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी सामने आ रही हो तो उसकी अनदेखी ना करें। अगर कोई तकलीफ बढ़ गई है तो तुरंत उसका इलाज़ करवाएं। त्योहारों पर परिवेश के प्रदूषण और खाने -पीने की अनियमितता, दोनों ही सेहत से जुड़ी समस्याओं को और बढ़ा देते हैं। त्योहार के बाद नॉर्मल दिनचर्या में लौटते हुए इन परेशानियों पर गौर करें। अगर कोई परेशानी सेलीब्रेशन के दिनों में हुई भागदौड़ और अस्वस्थ जीवनशैली की वजह हुई है तो उसे सही दिनचर्या अपनाकर ठीक करें। इसमें डिटॉक्सिफिकेशन से काफी मदद मिलती है। असल में देखा जाये तो डिटॉक्स डाइट को शरीर की अंदरूनी सफाई और फिटनेस से जोड़कर ही देखा जाता है। इससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कई तकलीफों का हल हो जाता है। इसीलिए त्योहार की ख़ुशी और खुमार को जीने के बाद डिटॉक्स डाइट आपके लिए बहुत मददगार साबित होगी। इससे ना केवल स्वस्थ दिनचर्या की ओर वापसी होती है बल्कि सेहत से जुड़ी किसी परेशानी को और बढ़ने से रोकने में भी मदद मिलती है।

घेर न ले तनाव और अवसाद – त्योहारी रौनक और खुशियाँ जिंदगी को खुशनुमा अंदाज़ में जीने के रंगों से रू ब रू करवाती हैं। लेकिन इन मौकों पर कई बार सामाजिक -पारिवारिक मेलजोल भी तनाव का कारण बन जाता है। आज की दिखावा संस्कृति में यह खूब देखने को मिलता है। यही वजह है कि पर्व उत्सव को मन से मनाएं पर दिखावे के खेल में ना उलझें। अब जो जीवनशैली अपनाई जा रही है उसने त्योहारों पर दिखावे से भरी दावतों और महंगे उपहारों ने इनके पारंपरिक उल्लास को अलग ही रंग दे दिया है। ऐसी बातें कई बार मानसिक तनाव का भी कारण बनती हैं। इसीलिए यह बात हमेशा के लिए मन में बसा लें कि हर बार एक के बाद एक आने वाले इन पर्व-त्योहारों की खुशियाँ सहेजनी हैं ना कि तनाव और कमतरी का भाव। नई ऊर्जा और आत्मीयता जुटानी है ना कि दिखावे को सोच। यूँ त्योहारों के मायने दिल की ख़ुशी और मेलजोल से है ना अपना रूतबा दिखाने से। सेहत, सुन्दरता, रोशनी और भाई बहन के प्रेम को सेलिब्रेट करें वाली इस त्योहारी शृंखला में रीत-रिवाज को जीयें। अपनों के साथ का सुख बटोरें। बस, हर हाल में इस दिखावे से उपजी नेगेटिविटी से ख़ुद को बचाएं। इसीलिए जरूरी है कि शरीर के साथ-साथ मन को भी डिटॉक्स करें। – डॉ. माेनिका शर्मा

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