सूर्य स्नान क​रिये, निरोग रहिए

जिस प्रकार शारीरिक सौंदर्य के लिए प्रत्येक अंग का पुष्ट व  सुगठित होना आवश्यक है उसी प्रकार जीवन के लिए जल, वायु, भोजन इत्यादि  आवश्यक तत्वों के साथ सूर्य स्नान लेना भी महत्त्वपूर्ण है। अक्सर लम्बे  घूंघट व बंद घरों में रहने वाली पर्दानशीन औरतों की जिंदगी का अधिकतर भाग  बीमारियों में गुजरता है। कारण है धूप की कमी। इस मामले में मजदूर महिलाएं  ज्यादा भाग्यशाली हैं।
आपने देखा होगा बहुत से पौधे पर्याप्त प्रकाश न मिलने के कारण  पीले होकर मुरझा जाते हैं जबकि दूसरे पौधे पर्याप्त धूप मिलने के कारण खूब  फलते-फूलते हैं।
सूर्य की धूप में मल, विकार, दुर्गंध व विष दूर करने की  अद्भुत शक्ति होती है। पसीने में भीगे कपडे़ बिना धोये धूप में सुखाने से  दुर्गन्ध रहित हो जाते हैं। इसी प्रकार रोगी को सूर्य स्नान कराने से उसकी  कमजोरी दूर होती है। रोगी व्यक्ति को सूर्यस्नान ऐसी जगह करवाना चाहिए जहां  तेज हवा न चलती हो। बहुत गंभीर रोगी को बहुत हल्के वस्त्र पहनाकर चारपाई  पर लिटाकर प्रात:काल सूर्यस्नान करवाना चाहिए। रोगी को सूर्यस्नान उसकी  इच्छानुसार कराना चाहिए। जब वह धूप में ऊब जाये या उसे सिरदर्द होने लगे तो  उसे फौरन हटा लेना चाहिए। साधारणतया सूर्यस्नान प्रात:काल या सायंकाल में जब धूप की  उष्णता कम रहती है, लेना चाहिए। जाडे़ में दोपहर को धूप लेना ठीक रहता है।
सूर्य स्नान करते समय सिर व चेहरे को छोड़कर सारा शरीर नग्न  होना चाहिए। स्नान लेते समय साफ सूती कपडे़ को पानी में भिगोकर तथा  निचोड़कर सिर व चेहरा अच्छी तरह ढक लें। घर की खुली छत पर इसे आराम से लिया  जा सकता है।
सूर्यस्नान लेने के प्रथम दिनों में पांच-मिनट का सूर्य स्नान  काफी है। धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ाते रहना चाहिए। 15 मिनट से लेकर एक  घंटे तक सूर्य स्नान सुविधानुसार लाभदायक सिद्ध होता है। सूर्य स्नान लेते  समय शरीर के प्रत्येक भाग से पसीना आना जरूरी है। जिन व्यक्तियों को पसीना  देर से आता है या बिल्कुल ही नहीं आता, उन्हें सूर्य स्नान के समय की मात्रा  बढ़ानी चाहिए। सूर्य स्नान के बाद ठण्डे पानी से सारे शरीर को मल-मल कर  धोना चाहिए। संभव हो सके तो स्नान के बाद किसी पार्क में थोड़ी देर टहलें।
राजयक्ष्मा जैसा भयंकर रोग भी सूर्य स्नान से नष्ट हो जाता  है।  इसके अतिरिक्त भगंदर और हड्डी का शैथिल्य जैसे रोग भी समाप्त हो जाते  हैं।   सूर्यस्नान से रक्त-कोष बढ़ते हैं, साथ ही शरीर के भार में वृद्धि होती है।  सूखा रोग में रोगी कुछ दिन सूर्य स्नान लेने से पुष्ट हो जाता है। अत:  सूर्य स्नान करिये व निरोग रहिये। इस मुफ्त के लाभदायक टानिक को लीजिए और  रोगों को भगाइये

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