सफलता के मुकाम तक कैसे पहुंचे

साधारणत: लोग दिमाग के ढीले होते हैं। वे अपने जीवन को पूर्ण बनाने की अपेक्षा सुस्त पड़े रहना और पुराने रास्ते पर चलते जाना पसंद करते हैं। वे स्वप्नदृष्टा नहीं होते। जो उन्हें अपनी स्थूल दृष्टि से दिखाई देता है, उसी से सन्तुष्ट रहते हैं। वे अपनी छिपी हुई शक्ति को जगाने का प्रयत्न नहीं करते, अत: वे जीवन में ऊंची चीजों का आह्वान नहीं कर पाते और जिंदगी भर जहां के तहां पड़े रह जाते हैं। यदि वे बुद्धिमत्ता-पूर्वक अपनी परिस्थितियों को बदलने का थोड़ा भी प्रयास करें तो वे अपनी जिदंगी को क्या से क्या बना सकते हैं। हम यह मानते है कि आपने अपने जीवन को उठाने का भरसक प्रयास किया है और असफल रहे हैं। कोई परवाह नहीं, पुन: प्रयत्न कीजिए। क्या जानते नहीं हैं कि असफलताओं की सीढ़ी पर चढ़कर ही सफलता के साम्राज्य में पहुंचा जाता है। कोई समय निश्चित कर लीजिए और उस समय आरंभ में केवल पन्द्रह मिनट तक शांतिपूर्वक ध्यान कीजिए। हड़बड़ी में काम करने की आदत आपके लिए पन्द्रह मिनट बैठना भी कठिन बना देगी पर धीरे-धीरे आप शांत रहना सीख जाएंगे और तब आपको शान्ति की कीमत ज्ञात हो जाएगी। पर आप ध्यान किसका करें? यह तो आप स्वयं तय करें। पर आप अपने ध्यान में इन प्रश्नों पर विचार कर सकते हैं-   साधारणत: लोग दिमाग के ढीले होते हैं। वे अपने जीवन को पूर्ण बनाने की अपेक्षा सुस्त पड़े रहना और पुराने रास्ते पर चलते जाना पसंद करते हैं। वे स्वप्नदृष्टा नहीं होते। जो उन्हें अपनी स्थूल दृष्टि से दिखाई देता है, उसी से सन्तुष्ट रहते हैं। वे अपनी छिपी हुई शक्ति को जगाने का प्रयत्न नहीं करते, अत: वे जीवन में ऊंची चीजों का आह्वान नहीं कर पाते और जिंदगी भर जहां के तहां पड़े रह जाते हैं। यदि वे बुद्धिमत्ता-पूर्वक अपनी परिस्थितियों को बदलने का थोड़ा भी प्रयास करें तो वे अपनी जिदंगी को क्या से क्या बना सकते हैं। हम यह मानते है कि आपने अपने जीवन को उठाने का भरसक प्रयास किया है और असफल रहे हैं। कोई परवाह नहीं, पुन: प्रयत्न कीजिए। क्या जानते नहीं हैं कि असफलताओं की सीढ़ी पर चढ़कर ही सफलता के साम्राज्य में पहुंचा जाता है। कोई समय निश्चित कर लीजिए और उस समय आरंभ में केवल पन्द्रह मिनट तक शांतिपूर्वक ध्यान कीजिए। हड़बड़ी में काम करने की आदत आपके लिए पन्द्रह मिनट बैठना भी कठिन बना देगी पर धीरे-धीरे आप शांत रहना सीख जाएंगे और तब आपको शान्ति की कीमत ज्ञात हो जाएगी। पर आप ध्यान किसका करें? यह तो आप स्वयं तय करें।

पर आप अपने ध्यान में इन प्रश्नों पर विचार कर सकते हैं-

  • किस तरीके से मैं अपने कार्यों को अच्छी तरह से कर सकता हूं?
  • मेरी उन्नति को कौन-सी बाधाएं रोक रही हैं?
  • मुझे किन विषयों एवं पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए?
  • मैं जिन व्यक्तियों से मिलता हूं, क्या उनका साथ मुझे उपयोगी एवं मुझे उन्नत बनाने वाला है?                                                             इन प्रश्नों पर आप गंभीरतापूर्वक नित्य विचार करें और आपका विचार करने का समय किसी भी बाधा से न टलने पाए। पन्द्रह मिनट विचार करने के बाद जो मुख्य बातें आपने सोची हैं, उनको लिख लीजिए। उन्हें आपने किस प्रकार कार्यान्वित करने की सोची है, इसे भी नोट कर लीजिए। उन्हें कार्यान्वित करने में आपकी हिम्मत एवं लगन की परीक्षा हो जाएगी। प्रारंभ में संभवत: आपको कई प्रकार की निराशाओं का सामना करना पड़ेगा पर उनसे घबराइए नहीं। अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए लड़ते जाइए। बिना युद्ध के मिली विजय से युद्ध के बाद मिली विजय अधिक मधुर होती है। ध्यान पर अपनी आस्था जमाए रहें। इसे बराबर करते रहें। ध्यान मस्तिष्क का वह श्रम है जिसके द्वारा आप तथ्यों के दर्शन कर सकते हैं। ध्यान आत्मा का प्राण है।

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