सड़क पर मोबाइल का इस्तेमाल जानलेवा बनता जा रहा है

मोबाइल फोन आज हमारी जिन्दगी का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। आज हम मोबाइल फोन के बिना रहने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। मोबाइल फोन जहां हमारे लिये उपयोगी साबित हो रहा है वहीं इसका दुरूपयोग जानलेवा भी साबित हो जाता है। दो पहिया वाहन चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना जिंदगी के लिए कितना घातक हो सकता है, इसका अंदाजा ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री की इस ताजा रिपोर्ट को देखकर लगाया जा सकता है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले साल दो पहिया वाहन चलाते हुए मोबाइल इस्तेमाल करने के कारण 2138 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे। इसके अलावा गलत स्पीड ब्रेकर, सड़क पर गड्ढे और निर्माणाधीन सड़कों के चलते रोजाना 26 लोगों की मौत हो रही है।मोबाइल फोन आज हमारी जिन्दगी का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। आज हम मोबाइल फोन के बिना रहने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। मोबाइल फोन जहां हमारे लिये उपयोगी साबित हो रहा है वहीं इसका दुरूपयोग जानलेवा भी साबित हो जाता है। दो पहिया वाहन चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना जिंदगी के लिए कितना घातक हो सकता है, इसका अंदाजा ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री की इस ताजा रिपोर्ट को देखकर लगाया जा सकता है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले साल दो पहिया वाहन चलाते हुए मोबाइल इस्तेमाल करने के कारण 2138 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे। इसके अलावा गलत स्पीड ब्रेकर, सड़क पर गड्ढे और निर्माणाधीन सड़कों के चलते रोजाना 26 लोगों की मौत हो रही है।रिपोर्ट बताती है कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली सबसे ज्यादा मौतों का कारण वाहन चलाने के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना है। वाहन चलाने के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल से सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में हुई हैं। इसके बाद हरियाणा का नम्बर है। राजधानी दिल्ली में इस कारण बीते साल 2 लोगों की मौत हुई, वहीं महाराष्ट्र में 172 लोगों की मौत इसके चलते हुई। यह पहली बार है जब सड़क परिवहन मंत्रालय ने राज्यवार इस प्रकार का डाटा एकत्रित किया है।इस रिपोर्ट के अनुसार देश में सड़क दुर्घटनाओं में करीब 17 लोगों की जान हर घंटे जाती है। यह रिपोर्ट गत 24 अप्रैल को प्रकाशित की गयी थी। मंत्रालय के अधिकारी मानते हैं कि इन दिनों हो रही सड़क दुर्घटनाओं में मोबाइल फोन का इस्तेमाल सबसे बड़ा कारण है। सड़क पर इसके इस्तेमाल के चलते वाहन चालक ही नहीं, पैदल चलने वाले भी दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि वाहन चलाते हुए मोबाइल फोन पर बात करना या सेल्फी लेने के मामले बढ़ रहे हैं। इससे न केवल ऐसा करने वालों की जान को खतरा है बल्कि दूसरों के लिए भी यह घातक है।विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट की मानें तो जो वाहन चलाने के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं, उनके वाहन टकराने का खतरा चार गुना अधिक बढ़ जाता है। यातायात पुलिस का कहना है कि वाहन चलाते हुए या सड़क पर पैदल चलते हुए मोबाइल के जरिए टेक्स्ट या बात करना ट्रैफिक के लिए बड़ा खतरा है। लोगों में यह बुरी लत बढ़ती जा रही है। इस सम्बन्ध में सेव लाइफ फाउंडेशन ने भी इस साल की शुरुआत में एक सर्वे किया था। सर्वे में ड्राइवरों ने यह माना था कि ड्राइविंग के दौरान मोबाइल इस्तेमाल करना असुरक्षित महसूस कराता हैं। वहीं 47 फीसदी लोगों ने यह माना था कि जब वे वाहन में बैठे होते हैं तो मोबाइल फोन पर आने वाली काल्स को वह उठाते हैं।सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने 2020 तक मौतों की संख्या में 50 फीसदी कमी लाने के निर्देश दिए थे जबकि रिपोर्ट से लगता है कि ये संभव नहीं हो रहा है ? अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर बहुत काम हो रहा है। जनवरी से जुलाई 2017 के बीच सडक दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में 4.75 फीसदी की गिरावट आई है। जनवरी से जुलाई 2017 के बीच दुर्घटनाओं की संख्या 2,36,458 पर गई जबकि 2016 में इसी अवधि में यह 2,43,870 थी। इसी अवधि में मृतकों की संख्या 2016 में 79,354 थी जो घटकर 2017 में 75,583 पर आ गई।मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाने के कारण 4,976 दुर्घटनाएं हुईं जिनमें 2,138 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी हालांकि सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारी भी मानते हैं कि इस आंकड़े से मामले की गंभीरता का सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है।  उनका मानना है कि मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाना सड़क दुर्घटना का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है और आने वाले समय में इसके चलते हादसों में बढ़ोत्तरी की आशंका है।दुपहिया वाहनों पर चलने वाले लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।  रिपोर्ट से साफ  है कि सड़क हादसों में सबसे ज्यादा जान गंवाने वाले दुपहिया वाहनों पर चलने वाले लोग ही रहते हैं। 2016 में मरने वाले कुल लोगों में 34 प्रतिशत यानी 52,500 लोग दुपहिया वाहनों पर सफर करने वाले थे, वहीं पैदल चलने वाले 15,746 लोगों को भी इन हादसों में जान गंवानी पड़ी। भारत में 2016 के दौरान प्रति एक लाख आबादी पर 11.9 लोग सड़क हादसों में मारे गए। राज्य सरकारों को इस मामले में सख्त कदम उठाने चाहिए। सरकार द्वारा सड़क हादसे रोकने के लिए जिला स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा जिनमें स्थानीय सांसद, विधायक, जिला अधिकारी सहित समाज के प्रमुख लोग शामिल होंगे। वे नियमित बैठक कर सड़क की स्थितियों में सुधार के लिए स्थानीय पालीटेक्निक छात्रों की मदद से सुधार का काम करेेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक इन हादसों की सबसे बड़ी वजह ड्राइवरों की गलती रही।  गति सीमा को पार करना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, ओवरटेकिंग और मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाना कुछ ऐसी गलतियां हैं जिनसे बड़ी संख्या में सड़क हादसे हो रहे हैं। कुल सड़क हादसों में से 84 फीसदी हादसों के पीछे ड्राइवरों की गलती होती है।सरकार ने इन हादसे को रोकने के लिए एक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति तैयार की है। इस नीति का मकसद इन हादसों के प्रति लोगों को शिक्षित और जागरूक करना है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का मानना है कि संसद में लंबित पड़े मोटर यान (संशोधन) बिल के पारित होने के बाद सड़क हादसों को रोकने के लिए और कारगर कदम उठाए जा सकेंगे। इस बिल में अन्य प्रावधानों के अलावा ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए लगाए जाने वाले जुर्माने में भारी बढ़ोत्तरी का भी प्रावधान है। n

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