लापरवाही ठीक नहीं ठंड में

सर्दी का मौसम प्रारंभ हो चुका है और शीघ्र ही सर्दी पीक पर पहुंच जाएगी। ऐसे में ठंड बढ़ने के साथ साथ कई दिक्कतें बढ़नी भी शुरू हो जाती हैं। अगर हम थोड़ी सी भी लापरवाही बरतेंगे तो वो हमें भारी भी पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इन दिनों सर्दी से बचने हेतु हमें लापरवाह नहीं होना चाहिए बल्कि बचाव के उपायों को गंभीरता से लेना चाहिए। आइए देखें किन मामलों में हमें गंभीर रहना चाहिए।स र्दी का मौसम प्रारंभ हो चुका है और शीघ्र ही सर्दी पीक पर पहुंच जाएगी। ऐसे में ठंड बढ़ने के साथ साथ कई दिक्कतें बढ़नी भी शुरू हो जाती हैं। अगर हम थोड़ी सी भी लापरवाही बरतेंगे तो वो हमें भारी भी पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इन दिनों सर्दी से बचने हेतु हमें लापरवाह नहीं होना चाहिए बल्कि बचाव के उपायों को गंभीरता से लेना चाहिए। आइए देखें किन मामलों में हमें गंभीर रहना चाहिए।जोड़ों की दिक्कतें- अक्सर जोड़ो में दिक्कतें इन दिनों बढ़ जाती हैं। आर्थोपेडिक एक्सपर्ट्स के अनुसार इन दिनों रोगियों की संख्या में खासा इजाफा होता है। आस्टियो आर्थराइटिस के कारण कई मरीजों के जोड़ सर्दियों में काम करना बहुत कम या बंद कर देते हैं। इसमें मसल्स, हड्डियां, लिंगामेंट, जाइंट लाइनिंग और जाइंट कवर भी शामिल होते हैं। इसके लक्षण तब सामने आते हैं जब सूजन और तेज दर्द शुरू होता है, तब रोगी को महसूस होता है कि उसे आर्थराइटिस है। इस हेतु बचाव के लिए सर्दी में बाहर कम निकलें। व्यायाम अवश्य करें अगर बाहर व्यायाम हेतु नहीं जा सकते तो डाक्टर द्वारा बताए व्यायाम घर पर करें।साइकलिंग सबसे अच्छा व्यायाम है। इससे पैरों और घुटनों की कार्टिलिज मोटी होती हैं। योगासन भी लाभप्रद होते हैं। सप्ताह में 4 बार आधे आधे घंटे का व्यायाम अवश्य करें जो लाभप्रद होता है।फ्रोजन शोल्डर- सर्दियों में कंधों में आई शिथिलता से भी अक्सर लोग परेशान रहते हैं विशेषकर मधुमेह वाले रोगी। मधुमेह के रोगियों को अपना ब्लड ग्लूकोज लेवल ठीक रखना चाहिए और नियमित व्यायाम कर जोड़ों की जकड़न को काबू में रखना चाहिए नहीं तो अधिक तकलीफ रहने से उन्हें स्टेरायड के इंजेक्शन तक लगवाने पड़ सकते हैं। इंजेक्शन अपने कई साइड इफेक्टस शरीर में छोड़ देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जोड़ों में कोलेजन टिश्यू में प्रोटीन जमा होने से भी ऐसी दिक्कतें आती हैं क्योंकि लोग सर्दी के डर से व्यायाम करना बंद कर देते हैं। ऐसा न करें। अपने सही खान-पान और नियमित व्यायाम से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। हाइपोथर्मिया का रखें ध्यान-हाइपोथर्मिया की स्थिति तब होती है जब शरीर का तापमान 45 डिग्री सेंटीग्रेड या 95 डिग्री फॉरेनहीट से कम हो जाए। रोगी को कंपकंपी हो रही हो तो ठीक है उसे गर्म स्थान पर रखें और उस पर गर्म वस्त्र डालें। अगर कंपकंपी न हो रही हो तो तुरंत डाक्टर से इलाज कराएं। इसमें बरती लापरवाही खतरनाक हो सकती है।वैसे हाइपोथर्मिया 3 तरह का होता है – हल्का,मध्यम और गंभीर। हल्के हाइपोथर्मिया में दिल की धड़कन बढ़ती है और कंपकंपी भी अधिक होती है। शरीर का तापमान 90 से 95 डिग्री फारेनहीट तक हो जाता है। मध्यम हाइपोथर्मिया में शरीर का तापमान 82 से 90 डिग्री फारेनहीट  तक हो जाता है। पल्स रेट अनियमित होने लगती है,दिल की धड़कन धीमी होने लगती है और आंखोंं के आगे धुंधलापन आने लगता है। कंपकंपी कम हो जाती है। गंभीर हाइपोथर्मिया में तापमान 82 डिग्री फारनहीट से भी कम हो जाता है। ब्लडप्रेशर कम हो जाता है, कोमा जैसी स्थिति आ जाती है, पल्स अनियमित हो जाती है और शरीर रिजिड पड़ने लगता है। ऐसे में तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है।कारण- जब कभी आप बिना गर्म कपड़ों के बाहर निकलते हैं या ठंडे पानी का अधिक इस्तेमाल करते हैं,नहाने में भी,तब यह स्थिति पैदा होती है। प्राय: ऐसे में बुजुर्ग लोग इसके शिकार होते हैं। रोगी की जांच थर्मामीटर से की जाती है।  प्राथमिक उपचार- रोगी को गर्म कपड़ों से एकदम ढक दें- कमरे का तापमान भी गर्म रखें ! 75 डिग्री फारेनहीट तक रख सकते हैं।चिल ब्लेन की परेशानी- चिल ब्लेन में हाथ पैर की उंगलियां लाल होकर सूज जाती हैं। कान के निचले भाग में भी सूजन और लाली आ जाती है। इन भागों में एकदम खुजली होने लगती है। जलन और मरमाहट महसूस होती है। कई बार इतनी खुजली होती है कि जख्म तक बन जाते हैं और स्किन कैंसर तक हो सकता है। इसकी शिकायत अक्सर उन लोगों को होती है जिनकी त्वचा संवेदनशील होती है। ऐसा अक्सर तक होता है जब गर्मी से एकदम ठंड में चले जाएं या तेज ठंड के बाद अचानक गरमाहट मिले तब ऐसी दिक्कत आती है। जिन दिनों ठंड पूरे जोर पर होती है तब यह समस्या अधिक होती है। मिड दिसंबर से मिड जनवरी तक संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को ध्यान रखना चाहिए। वैसे अक्सर यह दिक्कत महिलाओं को अधिक आती है।बचाव के लिए क्या करें n अगर त्वचा संवेदनशील है तो हाथों की उंगलियों में काम करते समय दस्तानों का प्रयोग करें और उसके बाद भी गर्म दस्ताने पहने रखें।n पैरों में पहले सूती जुराबें पहनकर ऊपर ऊनी जुराबें पहनें। कई बार ऊनी वस्त्र सीधी त्वचा के लिए ठीक नहीं रहते।n रोगी को सेंकाई के लिए हीटर का प्रयोग नहीं करना चाहिए, न ही गर्म कपडे़ से टकोर करना चाहिए।n हाथों-पैरों में अधिक ठंड लग रही हो तो गुनगुने पानी में हाथ पैर डुबो कर रखें। फिर पोंछकर दस्ताने और जुराबें पहनें।n खुजली अधिक हो तो डाक्टर की सलाह से स्टेरायड वाली टयूब लगा सकते हैं या एंटीएलर्जिक दवा ले सकते हैं।n अगर यह समस्या हर साल होती हो तो पहले से ही डाक्टर से दवा ले लें ताकि आर्टरी में सिकुड़न न हो।आंखों में रूखापन भी करता है परेशान- नेत्र चिकित्सक के अनुसार इन दिनों आंखों के रूखेपन की भी समस्या आम होती है। आंखों में दर्द और जलन की शिकायतें बढ जाती हैं। इससे बचने हेतु पानी खूब पीएं, रसदार फलों का सेवन करें जैसे गाजर, मूली, पालक, आंवला, संतरा, किन्नू आदि का नियमित सेवन करें। आंखों की सफाई का पूरा ध्यान रखें। ठंडी हवा में समस्या बढती हो तो बाहर जाते समय चश्मा पहनें। टीवी देखते समय,कंप्यूटर पर काम करते समय चश्मा पहनें। अगर फिर भी दिक्कत हो रही हो तो नेत्र चिकित्सक को दिखाएं।बुजुर्गों को विशेषकर सर्दी के दिनों में धूप निकलने पर ही बाहर जाना चाहिए। व्यायाम घर पर ही कर लें। अगर ब्लडप्रेशर या डायबिटीज के मरीज हैं तो दवाओं का सेवन समय समय पर करते रहें। खून पतले होने की दवा लेते रहें। संतुलित खानपान करें, धूम्रपान न करें। – नीतू गुप्ता

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