फिल्म रिव्यूः दिलजीत ने ‘सूरमा’ से जीत लिया दिल

मुंबईः बॉलीवुड में इन दिनों बायोपिक की होड़ लगी है, ऐसे में एक और बायोपिक सूरमा ने आज सिनेमा घरों में दस्तक दे दी है। फिल्म भारतीय हॉकी प्लेयर संदीप सिंह की बोयोपिक है, जिसमें संदीप सिंह का किरदार निभा रहे हैं दिलजीत दोसांझ। शाद अली के निर्देशन में बनी फिल्म को बॉक्स आफिस पर कमाल करने के लिए माउथ पब्लिसिटी की जरूरत है। फिल्म भारत के राष्ट्रीय खेल हॉकी और उसके लिए खिलाड़ियों की मरने की हद वाली दीवानगी रोंगटे खड़े कर देगी। सूरमा का एंथम पीछे मेरे अंधेरा आगे अंधी आंधी मैंने ऐसी आंधी में दिया जलाया है.. फिल्म के टाइटल को पूरा करता है। सूरमा में दिलजीत की एक्टिंग ने संदीप के दर्द को दोबारा जीने पर मजबूर कर दिया है।
ऐसी है कहानी
‘सूरमा’ की कहानी हॉकी के पूर्व कप्तान संदीप सिंह की जिंदगी पर आधारित है। संदीप (दिलजीत दोसांझ) हरियाणा के एक छोटे से कस्बे शाहाबाद में रहते हैं। 1994 में इसे देश की हॉकी की राजधानी कहा जाता था। कस्बे के ज्यादातर लड़कों का यही सपना है कि उन्हें भारतीय हॉकी टीम में खेलने का मौका मिले। संदीप की आंखें भी इसी सपने से भरी थीं लेकिन यह सपना तब टूटने लगता है जब कोच उनसे कड़ी मेहनत कराते हैं। इसके बाद वे हॉकी से दूर चले जाते हैं। कुछ समय के बाद संदीप की लाइफ में हरप्रीत (तापसी पन्नू) आती है और दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है। हरप्रीत संदीप को एक बार फिर हॉकी खेलने के लिए प्रेरित करती है और वे हॉकी को जिंदगी का गोल बना लेते हैं। संदीप की जिंदगी उस वक्त बिखर जाती है जब एक मैच के बाद घर लौटते समय उनकी कमर में गोली लग जाती है। जिससे कमर से नीचे का हिस्सा काम करना बंद कर देता है। रियल लाइफ संदीप ने कैसे वापस हॉकी में अपना मुकाम हासिल कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, फिल्म में यही देखने मिलेगा।
दमदार कहानी
दिलजीत दोसांझ ने संदीप सिंह के रोल के साथ पूरा इंसाफ किया है। पर्दे पर उन्हें देखकर संदीप सिंह की छवि बन जाती है। गजब की एक्टिंग के साथ उन्होंने हॉकी स्टिक का जादू भी दिखाया है। फिल्म की पूरी कहानी संदीप के इर्द-गिर्द है, ऐसे में उन्होंने एक्टिंग में सौ फीसदी दिया है। हरप्रीत का रोल निभाने वाली तापसी पन्नू पिछली कई फिल्मों से फैन्स के दिल पर छाप छोड़ने में कामयाब रही हैं और इस बार भी उन्होंने ऐसा ही किया।

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