जब हाे घुटनाें में दर्द

आजकल घुटनों में दर्द आम बात हो गयी है, जिसको देखो वही दर्द से दु:खी है घुटनों का दर्द कभी भी शुरू हो सकता  है। यह रोग किसी भी व्यवसाय  में लगे लोगों को होता है। एक बार दर्द शुरू हो जाता है और घुटने बदलने तक दर्द बंद नहीं होता है। दर्दनाशक दवाइयां खाते-खाते पेट बिगड़ता जाता है। पेट में अल्सर, शरीर का मोटापा आदि अनेक परिणाम दिखने लगते हैं। यह समस्या मोटे-दुबले दोनों प्रकार के स्त्री-पुरुषों में पाई जाती हैं। मोटे या स्थूल शरीर वालों को शीघ्र अनुभव होने लगता है।आ  जकल घुटनों में दर्द आम बात हो गयी है, जिसको देखो वही दर्द से दु:खी है घुटनों का दर्द कभी भी शुरू हो सकता  है। यह रोग किसी भी व्यवसाय  में लगे लोगों को होता है। एक बार दर्द शुरू हो जाता है और घुटने बदलने तक दर्द बंद नहीं होता है। दर्दनाशक दवाइयां खाते-खाते पेट बिगड़ता जाता है। पेट में अल्सर, शरीर का मोटापा आदि अनेक परिणाम दिखने लगते हैं। यह समस्या मोटे-दुबले दोनों प्रकार के स्त्री-पुरुषों में पाई जाती हैं। मोटे या स्थूल शरीर वालों को शीघ्र अनुभव होने लगता है।क्यों होता है घुटनों का दर्द- इसका सपाट उत्तर चिकित्सक यह कहकर देते हैं- शरीर मोटा होना, वंशानुगत या चोट लगने से, उमर का तकाजा, बुढ़ापा आदि। लेकिन, अनुसंधान से घुटनों के दर्द का एक कारण का पता चला है कि इसकी और भी वजह हो सकती है कि किसी रोगी को घुटनों पर चोट लगना, दुर्घटना में घुटने की टूट-फूट होना, घुटनों के बल गिर पड़ना आदि से जो दर्द बढ़ता है, वह जीवनभर रह सकता है। उससे ट्रॉमा निर्माण होता है। उसे ट्रॉमा आर्थराइटिस कहते हैं। इसका स्थायी उपचार व्यायाम ही होता है। उपरोक्त कारण सभी जानते और मानते हैं, परंतु इनमें से  किसी भी कारण के न होने पर भी घुटनों में दर्द होता है तो उसका प्रमुख कारण घुटनों को मोड़कर (एक घुटना या दोनों) रात्रि को सोना पाया जाता है। जो व्यक्ति एक घुटना मोड़ता है उसका वही घुटना दर्द करता है और दूसरा ठीक रहता है। इसके अलावा  दैनिक जीवन में चलने-फिरने, चढ़ाव चढ़ने, सैर करने, व्यायाम करने, व्यायाम करने से घुटनों के जोड़ों में स्थित कारटीलेज का क्षय होता है। इसकी क्षतिपूर्ति रात्रि को घुटनों के सीधे रखने एवं रक्तसंचार सुचारु् रूप से संभव है तभी कारटीलेज अपनी सामान्य आकृति में बनी रहती है और जोड़ का संचालन सामान्य होता है, परंतु रातभर घुटने मोड़ने से यह कार्य अनेक वर्षो से बंद हो जाता है। कारटीलेज में द्रव या कोलोजन रक्त प्रवाह के अभाव में आपस में जुड़ने लगती है। रोगी को खडे़ होने पर अपना वजन ढोना और चलते समय संतुलन बनाना मुश्किल लगता है। हडि्डयां आपस में टकराकर टेढ़ी होने लगती हैं।होम्योपैथिक औषधियाँ कुछ दिन लगातार खाने से एवं चिकित्सक के सलाह पर कुछ चिकित्सक द्वारा बताये व्यायाम करे अवश्य फायदा होगा।आर्जेण्टम मेटालिकम- शरीर के किसी भी स्थान में दर्द प्रायः बायीं ओर, दर्द बढ़ जाना और फिर कम हो जाना, जोड़ों, कोहनियों और घुटनों पर दर्द अधिक होना, पैरों में कमजोरी, पैर कांपना, ऐड़ी का फूल जाना, इत्यादि में लाभदायक है।रसटॉक्स- सर्दी लग कर या पानी में भींगने के वजह से घुटने में दर्द, जाड़े के दिनों में दर्द, चलने पर आराम मालूम होता है और बैठने पर दर्द शुरू होना,  गाँठों में वात की तरह दर्द व पुरानी चोट के दर्द में इसको प्रयोग किया जाता है।ब्रायोनिया- घुटने में सुई गड़ने जैसा दर्द होता हो, दर्द इधर से उधर दिशा बदलते रहता है, चलने पर दर्द का बढ़ जाना, हिलने-डुलने पर दर्द का बढ़ जाना, घुटने में कड़ा-पन और दर्द, घुटने में सूजन रहता हो, अन्य औषधियों में लाइकोपोडियम,स्टेलेरिया मिडिया, सायलिसिया, केल्केरिया फ्लोर, काल्मिया, लैटविया, कैक्टस ग्रेड़ीफ्लोरा, डल्कामारा, काली कार्ब, मैगफास,फेरम-पिक्रीरीकम,  इत्यादि अत्यंत कारगर होम्योपैथिक दवाएँ हैं। उपरोक्त दवाएं केवल उदहारण के तौर पर दी गयी है कृपया किसी भी दवा का सेवन बिना योग्य चिकित्सक के परामर्श के बिना ना ले। क्योकि होम्योपैथी में सभी व्यक्तियों की शारीरिक और मानसिक लक्षण के आधार पर अलग -अलग दवा होती है ! – डॉ. देवश्लाेक शर्मा

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