और रानी ने बच्चे को नहीं दिया

इंग्लैण्ड की परिकथा है कि एक परी थी वह जादू करती थी। ऐसा सोचकर  1 आटे चक्की का मालिक अपने राजा के पास गया और बोला, –‘महाराज! मुझे मामूली चक्कीवाला समझकर मिलने से इंकार न करें मेरी एक  बेटी है वह परियों की तरह जादू जानती है वह चक्की घुमाकर ‘सोना’ बना सकती है। आप खर-पतवार भी देंगे तो वह चक्की में डालकर घुमा देंगी तो ‘सोना ‘बन जायेगा  …. । ‘इंग्लैण्ड की परिकथा है कि एक परी थी वह जादू करती थी। ऐसा सोचकर  1 आटे चक्की का मालिक अपने राजा के पास गया और बोला, –‘महाराज! मुझे मामूली चक्कीवाला समझकर मिलने से इंकार न करें मेरी एक  बेटी है वह परियों की तरह जादू जानती है वह चक्की घुमाकर ‘सोना’ बना सकती है। आप खर-पतवार भी देंगे तो वह चक्की में डालकर घुमा देंगी तो ‘सोना ‘बन जायेगा  …. । ‘राजा को बहुत आश्चर्य हुआ वह बोला ,–‘ठीक है तुम कल उसे लाना, मैं खुद इस बात की पुष्टि करूँगा। ‘—वह चौंक गया फिर बोला,–‘ठीक है महाराज ‘और अभिवादन करके चला गया। दूसरे दिन राजा ने लड़की को  खर से भरे एक कमरे में ले जाकर कहा, –‘देखो, यह रही चक्की और खर,… अब तुम इसे सोने में बदलो। मैं कल आकर तुम्हारी जादुई शक्ति का कमाल देखूंगा और अगर इस नहीं हुआ तो मैं तुम्हें मौत के घाट उतार दूँगा। ‘लड़की, जिसका नाम ‘रूपा’था। वह कोई जादू-वादू नहीं जानती थी। अब वह इस  भय से रोने लगी कि कल राजा मुझे मार डालेगा। …. इतने में एक बौना, विचित्र परिधान पहने वहां आया। उसने उससे पूछा कि, -‘तुम क्यों रो रही हो ?….” –रूपा ने रोते -रोते सब बता दिया कि मैं तो एक सामान्य लड़की हूँ, पर मेरे पिता ने झूठ बोल दिया क्योंकि महाराज किसी साधारण व्यक्ति से नहीं मिलते। … अब मैं क्या करूँ ?…. ‘बौना आदमी बोला, –‘घबराओ मत, मैं अभी इन खर-पतवार को ‘सोने’ में बदल देता हूँ। .. पर तुम मुझे क्या दोगी…. । ‘–रूपा बोली –‘मैं अपना हार देती हूँ ‘—कहकर दे दिया, तब बौने व्यक्ति ने एक खास अंदाज में कोई धुन गुनगुनाई और सब घास-फूस सोने में बदलने लगे। रूपा ने बौने को धन्यवाद कहा कि उसने उसकी जान बचा  दी। –राजा ने देखा तो वह आश्चर्यचकित रहा गया। वह उससे भी बड़े कमरे में ले गया ,जहाँ घास -पतवार भरा हुआ था। राजा बोला –‘ठीक है, मैंने तुम्हारी  जादुई शक्ति देख ली। अब एक बार फिर चक्की चलाकर इन्हें भी सोने में बदल दो नहीं तो तुम कल मारी जाओगी। ‘रूपा फिर रोने लगी कि 1 बार तो बच  गई पर अब मरने  से कैसे बचूँ ?…. फिर बौना आया और उससे बोला कि इस बार क्या दोंगी अगर मैं सोना बना दूँ तो ?… ‘-रूपा ने अंगूठी दे दी, फिर उसने अनोखी धुन गुनगुनाकर पूरा कमरा सोने से भर दिया। बड़े कमरे को सोने से  भरा देखकर राजा बहुत खुश हुआ और बोला –एक अंतिम बार अपनी शक्ति (जादुई )से और सोना बना दो मैं तुमसे विवाह कर लूँगा नहीं तो मार डालूंगा ….. । ‘रूपा ने अपना सिर पीट लिया। हताशा से बोली कि —मैं मौत के द्वारा ही यहाँ से आजाद हो सकती हूँ। ‘–धूर्तता से मुस्कुराता हुआ, बौना फिर आया और बोला –‘राजा अभी तक संतुष्ट नहीं हुआ ?…. अगर मैं यह काम कर दूँ तो इस बार मुझे क्या मिलेगा। …… ?’रूपा सुबकते हुए बोली –‘-मेरे पास अब कुछ भी नहीं है ,तुम कुछ मत करो। वैसे भी कल तो मुझे मरना  ही है। ‘–बौना बोला —‘अगर तुम अपने पहले बच्चे को मुझे दोगी तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ। ‘रूपा ने राहत की साँस ली और बोली –‘राजा से शादी करने के बाद मेरी पहली संतान मैं तुम्हें सौंप दूँगी। मैं मरना  नहीं चाहती,मैं वादा करती हूँ। ‘बौने ने मदद कर दी। राजा ने रूपा को अपनी रानी बना लिया। वक्त बीता ,उसकी प्रथम सन्तान लड़का हुआ। वह बहुत खुश होकर उसे सुला रही थी कि तभी बौना आया और उसने उसका वादा याद दिलाया। रूपा गिडग़िडाने लगी कि –‘मैं तुम्हें सब कुछ दे सकती हूँ जो तुम चाहो, …. पर मैं अपने बच्चे को नहीं दे पाऊँगी। ‘बौना उसे बुरा -भला कहने लगा कि –‘तुमने वादा तोड़ा है। यह सही नहीं है मुझे तो बच्चा ही चाहिए। ‘—रूपा अपने राज्य की सारी दौलत देने को तैयार हो गई पर वह नहीं माना। –रूपा के बहुत

गिड़गिड़ाने पर धूर्त मुस्कान के साथ बोला –‘अच्छा मैं तुम्हें तीन दिन का वक्त देता हूँ, मेरा नाम क्या है…इसका पता लगाकर बोल दोगी तो मैं तुम्हारे बेटे को छोड़ दूँगा। यह एक अंतिम मौका है अगर नहीं बता सकी तो यह बच्चा मेरा होगा।’ —रूपा ने आदमियों को भेजकर (उसके पीछे )उसका नाम जानने की आज्ञा दी, कहा –‘जाओ, गाँव, गली कहीं से भी उसका नाम जानकर आओ। ‘पहले दिन निकल गया , दूसरा दिन गुजर गुजर गया। बौना आता और हँसकर चला जाता। तीसरे दिन रूपा ने घबराकर अपने दूतों को कहा कि —‘दूसरे नगर जाकर पता करो, आज पता चल जाना चाहिए, नहीं तो तुम लोगों की खैर नहीं। ‘.. –शाम हो चुकी थी। रानी घबड़ा रही थी ,तभी दूत ने खुश होकर बौने का नाम बताया तो रानी ने पूछा —‘बड़ा ही अजीब सा नाम है पर तुम्हें कैसे पता चला ?….. ‘दूत ने बताया कि वह बौना महल से निकलकर एक जंगल में बनी कुटिया के पास आग जलाकर गाना गा रहा था कि —‘आज मैं पकाऊँगा, कल मैं पकाऊँगा और फिर मुझे रानी का बच्चा मिलेगा, किसी को भी नहीं पता ?   कितना अजीब मेरा नाम है —रूपलस्टिंग..   रूपलसटिंग … । ‘बौना आया तो रानी ने उसका नाम ‘रूपलस्टिंग… ‘बता दिया। अब तो बौना ग़ुस्से से आग बबूला हो उठा तथा पैर पटकता हुआ महल से निकल गया। –रानी ने सारे नामों की फेहरिस्त फेंककर अपने बच्चे को सीने से लगा लिया। अब उसके बच्चे को कोई उससे दूर नहीं ले जा सकेगा। – अन्जु सिंगड़ोदिया

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