अाैली – भारत का सबसे बड़ा स्कीइंग क्षेत्र है

धुंध के रूप में लिपटे बादल, ऊंचे ऊंचे आसमान छूते सफेद चमकीले पहाड़, बर्फ से ढकी चोटी, मीलों दूर तक जमी बर्फ की सफेद चादर, जहां नजर दौड़ाइए बर्फ की प्राकृतिक फिसलपट्टी, दिलकश नजारे देखने देश-विदेशाें से पर्यटक यहां अाते है। यह खूबसूरत जगह समुद्रतल से 2500 मीटर से लेकर 3050 मीटर की ऊंचाई तक 6 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह उत्तराखंड के सबसे ऊपरी भाग पर स्थित अाैर सबसे  है। उत्तराखंड भारत के उन राज्याें में से एक जाे अपने प्राकृतिक साैंदर्य अाैर पर्वताें के लिए पुरे देश भर में मशहूर है।
औली भारत का सबसे बड़ा स्कीइंग क्षेत्र है जहां जाकर आप भूल ही जाएंगे कि अाप भारत में है या स्विट्जरलैंड में। जिन लोगों ने कभी स्कीइंग करने या सीखने में अरमान संजो रखा हो, उनके लिए एक अादर्श जगह है अाैली। देश में गुलमर्ग (कश्मीर) और नारंकडा (हिमाचल प्रदेश) के बाद स्कीइंग का नवीनतम तथा विकसित केंद्र औली है, जहां लोग स्कीइंग करने का अपना अरमान पूरा कर सकते हैं। बरसात के मौसम में हरे घास साथ ही पचासों किस्म के फूल भी खिल आते हैं, जिन्हें देखना और देखते रहना बहुत सुखद लगता है। ये ढलानें दिसंबर के मध्य से मार्च के मध्य तक सफेद कालीन जैसी बर्फ की मोटी परतों से ढकी रहती हैं। तब स्कीइंग करने वालों के समूह के कारण यहां का नजारा बहुत ही मोहक दिखता है। यह जगह ओक धार वाली ढलानों और सब्ज शंकुधारी जंगलों के लिए जानी जाती है। औली का इतिहास 8वीं शताब्दी में पाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, गुरु आदि शंकराचार्य इस पवित्र स्थान पर आए थे। इस जगह को बुग्याल भी कहा जाता है जिसका स्थानीय भाषा में अर्थ है घास का मैदान। ओस की ढलानों पर चलते हुए पर्यटक नंदादेवी, मान पर्वत तथा कामत पर्वत शृंख्ला के अद्भुत नजारें देख सकते हैं। यात्री इन ढलानों से गुजरने पर सेब के बाग और हरेभरे देवदार के पेड़ देख सकते हैं। नंदा देवी के पीछे सूर्योदय देखना एक बहुत ही सुखद अनुभव है। औली में प्रकृति ने अपने सौन्दर्य को खुल कर बिखेरा है। बर्फ से ढकी चोटियों और ढलानों को देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। यहां पर कपास जैसी मुलायम बर्फ पड़ती है और पर्यटक खासकर बच्चे इस बर्फ में खूब खेलते हैं। यहां पर देवदार के वृक्ष बहुतायत में पाए जाते हैं। इनकी महक यहां की ठंडी और ताजी हवाओं में महसूस की जा सकती है। शहर की भागती-दौड़ती जिंदगी से दूर बर्फ गिरते महसूस करना, रात में खुले आकाश को देखना, स्कीइंग करना न करने वाले दोनों ही तरह के पर्यटक जिनमें हनीमून मनाने वाले युगल अच्छी-खासी संख्या में यहां आते हैं।

भारत का सबसे बड़ा स्कीइंग क्षेत्र
औली में चार मुख्य स्लोपस हैं, जैसे – 900 मीटर लम्बा, 800 मीटर लम्बा, 400 मीटर लम्बा, 3.1 किलोमीटर लम्बा। यहां दो विश्वस्तरीय स्की लिफ्ट भी हैं, जो की लोगों काे वापस ऊंचाई पे ले जाती हैं। स्की करने के लिए व्यस्कों से 500 रुपये से 700 और बच्चों से 350 रुपये शुल्क लिया जाता है। गढ़वाल मण्डल विकास निगम ने यहां स्की सिखाने की व्यवस्था की है। मण्डल द्वारा 7 दिन के लिए नॉन-सर्टिफिकेट और 14 दिन के लिए सर्टिफिकेट ट्रेनिंग दी जाती हैमशहूर पर्यटन स्थन । 7 दिन तक स्की सीखने के लिए भारतीय पर्यटकों से 4,710 रुपये शुल्क लिया जाता है अाैर 14 दिन तक स्की सीखने के लिए भारतीय पर्यटकों से 9,440 रुपये और विदेशी पर्यटकों से 11,800 रुपये शुल्क लिया जाता है। यह ट्रेनिंग हर वर्ष जनवरी-मार्च में दी जाती है। मण्डल के अलावा निजी संस्थान भी ट्रेनिंग देते हैं। यह पर्यटक के ऊपर निर्भर करता है कि वह कौन-सा विकल्प चुनता है।

दर्शनीय स्थल
जाड़ा, गर्मी और बरसात तीनों मौसम में औली घूमने का आनंद भले ही बदलता रहता हो, यहां के रोप वे (रज्जू मार्ग) का महत्व हमेशा बरकरार रहता है। वस्तुत: यहां का सबसे बड़ा आकर्षण यह रज्जू मार्ग ही है। विश्व का श्रेष्ठतम तकनीक से निर्मित, एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा यह रज्जू मार्ग 4 किलोमीटर लंबा है। समुद्र-तल से 1927 मीटर से 3027 मीटर की ऊंचाई तक चलने वाले इस रज्जू मार्ग में 10 विशाल स्तंभ और दो केबिन हैं। इस रज्जू मार्ग के केबिन से यहां के विस्तृत भू-भाग के आवासीय क्षेत्र, जंगल, खेत ऊंचाई से दिखते ही हैं, सामने नजर दौड़ने पर नंदा देवी, द्रोण गिरि, नीलकंठ, मानापीठ, कामेट, हाथी गौरी आदि हिमाच्छादित पर्वतों का विहंगम दृश्य भी दृष्टिगोचर होता है। इसके अलावा जोशीमठ बहुत ही पवित्र स्थान है। यह माना जाता है कि महागुरू आदि शंकराचार्य ने यहीं पर ज्ञान प्राप्त किया था। इसके अलावा यहां पर नरसिंह, गरूड मंदिर, आदि शंकराचार्य का मठ और अमर कल्प वृक्ष है। यह माना जाता है कि यह वृक्ष लगभग 2,500 वर्ष पुराना है। इसके अलावा तपोवन भी घुमा जा सकता है। तपोवन पवित्र बद्रीनाथ यात्रा के रास्ते में पड़ता है। यहीं से बद्रीनाथ यात्रा की शुरूआत मानी जाती है। गुरसौं बुग्याल, छत्राकुंड, सेलधार, क्वारी बुग्याल, चिनाब झील प्रमुख है।

प्रमुख बिंदु
औली बहुत ही विषम परिस्थितियों वाला पर्यटक स्थल है। यहां घूमने के लिए पर्यटकों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि औली आने से पहले शारीरिक व्यायाम करें और रोज दौड़ लगाएं। औली में बहुत ठंड पड़ती है। यहां पर ठीक रहने और सर्दी से बचने के लिए उच्च गुणवत्ता के गर्म कपडे़ पहनना बहुत आवश्यक है।
गर्म कपड़ाें में कोट, जैकेट, दस्ताने, गर्म पैंट, टोप, मोजे, दस्ताने, मफलर्स, पुलोवर्स, विंड प्रूफ जैकेट, जुराबें, सनग्लासेस, पानी की बोतल, गम बूट या स्नो बूट तथा टार्च बहुत आवश्यक है। बर्फ में हानिकारक कीटाणु होते हैं जो आपके स्वास्थ्य और शरीर को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। अत: बर्फ को खाने का प्रयास न करें।

बेहतर समय
हालांकि गर्मी के दिनों में भी औली में काफी आनंद आता है और बरसात के मौसम में अनगिनत प्रकार के फूल-पौधे देखने को मिलते हैं, लेकिन इस स्थान की विशेषता और महत्ता को देखते हुए यहां दिसंबर के मध्य से मार्च के मध्य तक की अवधि में आने पर यात्रा अधिक सार्थक होती है।

पहुंचने के साधन
चूंकि औली को अभी तक रेलमार्ग और वायुमार्ग द्वारा सीधे नहीं जोड़ा गया गया है, अत: इन दोनों साधनों द्वारा यहां तक नहीं पहुंचा जा सकता। यहां का निकटतम हवाई अड्डा देहरादून अाैर रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। वहां से सड़क मार्ग द्वारा (बस या टैक्सी से) औली पहुंचा जा सकता है। जोशीमठ से अाैली की दूरी मात्र 22 मिनट है अाैर यहां से कार या टैक्सी भी ली जा सकती है। ज्यादा रोमांच चाहते हैं तो केबल कार का सहारा भी ले सकते है। यदि दिल्ली, वाराणसी तथा आगरा से जा रहे हैं तो हरिद्वार सबसे करीब स्टेशन है। जोशीमठ हरिद्वार से 276 किलोमीटर, ऋषिकेश से 253 किलोमीटर, देहरादून से 295 किलोमीटर की दूरी पर है।

वायु मार्ग
काेलकाता से देहरादून हवाई मार्ग का किराया करीब 3988 रुपये, (एक तरफा किराया) है, बशर्ते आपने बुकिंग चार माह पहले से ही करवायी हो।

रेल मार्ग
काेलकाता से अाैली के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन हरिद्वार है। स्लीपर क्लास का माध्यम लेते हैं ताे किराया करीब 630 रुपये, एसी थ्री टीयर का किराया करीब 1670 रुपये है।

कहां ठहरें

कहां ठहरेंऔली में रूकने के लिए क्ल्फि टॉप रिसोर्ट सबसे अच्छा स्थान है। यहां से नंदा देवी, त्रिशूल, कमेत, माना पर्वत, दूनागिरी, बैठातोली और नीलकंठ का बहुत ही सुन्दर दृश्य दिखाई देता है। यहां पर खाने-पीने की अच्छी सुविधा है। यह चारों तरफ से बर्फ से घिरा हुआ है। इसके अलावा गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा लगभग दो दर्जन हट्स बनाए गए हैं, जिनमें से कुछ फाइबर ग्लास के हैं। इस स्थान पर कमरों के अलावा डॉरमेट्री भी उपलब्ध हैं कम राशि पर। यहां पर कैंटीन और अच्छे रेस्तरां भी हैं। औली में जब बर्फ पड़ती है तो बहुत पर्यटक आते हैं। पर्यटकों की बढ़ी संख्या के फलस्वरूप सभी होटल भर जाते हैं ताे पीक सीजन के समय यहां पहले से बुकिंग करवा लें, अन्यथा आपको दिक्कत हो सकती है।     -श्रावंतिका   

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