आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने ओपीडी स्वास्थ्य बीमा के लिए ऐप लाॅन्च किया

आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने स्वास्थ्य बीमा के लिए हेल्थकेयर प्लेटफाॅर्म प्रेक्टो के साथ ‘आईएल टेककेयर’ नाम से ऐप लाॅन्च किया है। यह ऐप आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के सभी ग्राहकों का आउटपेशेंट (ओपीडी) संबंधी सारा खर्च कवर करेगा।
इसमें डॉक्टर परामर्श, चिकित्सा परीक्षण, फार्मेसी खर्च आदि शामिल हैं। इस ऐप के जरिए ग्राहक ओपीडी संबंधी खर्च का भुगतान ऑनलाइन कर सकते हैं। आईएल टेककेयर ऐप प्रेक्टो की ट्रिनिटी तकनीक के साथ काम करता है और इससे ग्राहकों को उन डाॅक्टरों के यहां कैशलैस विजिट करने की सुविधा मिलती है जो अकेले ही अपना क्लीनिक चलाते हैं। आईएल टेककेयर ऐप उपयोगकर्ता चिकित्सा परीक्षणों के लिए एक नेटवर्क डायग्नोस्टिक्स केंद्र बुक करने के साथ ऐप पर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। यहां स्वचालित आॅनलाइन मेडिकल रिकॉर्ड बन जाता है। साथ ही वे छूट की दरों पर दवाएं भी ले सकते हैं।

आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ भार्गव दासगुप्ता ने बताया कि हमारा आईएल टेककेयर ऐप स्वास्थ्य देखभाल के एक बड़े और वर्तमान उपेक्षित पहलू को पूरा करता है। इस समाधान के साथ हम ग्राहकों को सस्ती आउट पेशेंट सुविधा और उपचार का लाभ उठाने में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आईएल टेककेयर में ग्राहक ऐप के जरिए बुकिंग कराते हुए या सीधे ही आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के पैनल में शामिल क्लीनिक्स पर जा सकते हैं। सिस्टम उन्हें स्वचालित रूप से पहचान लेगा और पारदर्शिता में सुधार के लिए लेनदेन की पुष्टि करेगा।

प्रेक्टो के संस्थापक और सीईओ शशांक एनडी ने कहा कि प्रेक्टो मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवा को सरल बनाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र बाजार 2021 तक 20 प्रतिशत तक सीएजीआर के साथ 500 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसी स्थिति में आउट पेशेंट कवरेज की कमी इस क्षेत्र के विकास के लिए बड़ा अवरोधक है, जिसमें दो-तिहाई चिकित्सा खर्च आम आदमी की जेब पर भारी पड़ेगा। अनुमानतः आकार के मामले में स्टैंडअलोन आउट पेशेंट की देखभाल मौजूदा स्वास्थ्य बीमा बाजार के 6 गुना होगी। ड्रग्स, डायग्नॉस्टिक्स, परामर्श और परीक्षण ऐसे खर्च हैं, जिन्हें वहन करना बहुत मुश्किल होता है। भारत में आउटपेशेंट खर्चों को अपनी निजी आय या बचत से पूरा किया जाता है इसीलिए विभिन्न चिकित्सा सेवाओं के लिए ओपीडी रोगियों की भुगतान करने की क्षमता का मुद्दा उठाया जाता है। करीब-करीब 3.5 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे है, क्योंकि वे अपनी क्षमता से बाहर जाकर खर्च करते हैं और अगर ओपीडी के खर्चों को हटा दिया जाए तो यह आंकडा 0.5 फीसदी तक आ सकता है।

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