283 और दवाओं पर लगेगा प्रतिबंध

हमारे संवाददाता

नई दिल्‍लीः आम तौर पर हम सर्दी-जुकाम, खांसी और दर्द जैसी बिमारियों का इलाज खुद ही बिना डॉक्टर की सलाह के फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं से कर लेते हैं। अधिकतर लोगों को इन दवाओं के नुकसान के बारे में पता ही नहीं है। स्वास्थ मंत्रालय ने एफडीसी दवाइयों से होने वाले नुकसान को देखते हुए सख्त कदम उठाते हुए कई कंपनियों को पत्र लिख कर सुरक्षा और विपणन की रिपोर्ट मांगी है। सरकार ने इस साल मार्च में 344 एफडीसी दवाइयों को प्रतिबंधित कर दिया था, माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही 283 और एफडीसी दवाइयों को प्रतिबंधित कर सकती है।

कई देशों में प्रतिबंधित

बाजार में बिकने वाले कई सारे एफडीसी दवाओं में अधिकतर दूसरे देशों में प्रतिबंधित हैं। लेकिन भारत में ऐसी कई सारी दवाइयां है जिनको राष्‍ट्रीय दवा नियामक यानी द सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन की और से कभी मंजूरी मिली ही नहीं पर वह बाजार में किसी भी दवाइ की दुकान में आसानी से उपलब्‍ध है।

एफडीसी को लेकर जागरूकता में कमी

भारतीय फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में अभी तक लोगों को एफडीसी के बारे में कुछ खास जानकारी नहीं है। यही वजह है कि ये दवाइयां धड़ल्ले से बिक रही है। इन दवाओं के नुकसान को जाने बिना लोग इसे खरीदते हैं। 2007 में भी राष्ट्रीय नियामक ने 294 एफडीसी दवाइयों पर प्रतिबंध लगाया था। कई सालों तक मामला चर्चा में रहने के बाद केंद्र सरकार ने एफडीसी नियामक के मानदंड और क्षमताओं की पड़ताल करने के लिए एक कमेटी बनाई। कमेटी ने 2012 में अपनी रिपोर्ट दी, जिसके मुताबिक एफडीसी की मंजूरियों सहित कई मुद्दों पर इन दवाइयों में खामियां पाई गईं।

बिना मंजूरी के बिक रही है दवा

आपको जानकर हैरानी होगी कि बाजार में मिल रही कई एफडीसी की जांच तक नहीं हुई है। मरीजों की जान की कीमत पर करोड़ों, अरबों रुपये की एफडीसी दवाइयों का कारोबार किया जा रहा है। कमेटी के रिपोर्ट के मुताबिक राज्य स्तर की एजेंसियां ऐसे नए फॉर्मूलेशनों के लिए भी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस दे रही थीं, जिन्हें ड्रग कंट्रोलकर जनरल ने मंजूरी नहीं दी है। बड़ा सवाल है की आखिर बिना किसी मंजूरी के बाजार में इतनी सारी एफडीसी कैसे मिल बिक रही है?

क्या है नुकसान

इन दवाइयों को ज्यादा मात्रा में या नियमित तौर पर लेना से सेंट्रल नर्वस सिस्टम और लीवर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। एफडीसी युक्त एंटीबायोटिक से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। अक्सर डॉक्टर भी मरीजों को ये दवाएं देते है, जो दवाइ की दुकान पर आसानी से उपलब्‍ध होती है।

सिरप पर भी रोक

सरकार ने फाइजर की कॉरेक्स और एबॉट की फेनेसिडिल के अलावा कफ सिरप पर भी रोक लगाया है। सरकार की दलील है कि कंपनियां एफडीसी कॉम्बिनेशन से कैप्सूल और कफ सिरप तैयार करती हैं। यही नहीं कंपनियां 1 राज्य में मंजूरी लेकर देशभर में ये दवाएं बेचती हैं। एफडीसी कंपनियां अलग-अलग ब्रांड के नाम के साथ बिकती हैं।

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