साबुन बनाने वाली निरमा ने खरीद लिया लाफार्ज का सीमेंट कारोबार

Nirma_lafarge deal

नई दिल्ली : डिटर्जेंट और साबुन बनाने वाली कंपनी निरमा लिमिटेड अब सीमेंट भी बनाएगी। इसके लिए उसने विश्व की सबसे बड़ी सीमेंट निर्माता कंपनी लाफार्ज होल्सिम लिमिटेड की भारतीय संपत्ति को 1.4 अरब डॉलर (9478 करोड़ रुपए) में खरीद लिया। लाफार्ज ने कहा कि विनिवेश से मिलने वाली राशि का उपयोग कर्ज को कम करने के लिए किया जाएगा।  यह समझौता भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के अनुमोदन के अधीन है।
लाफार्ज इंडिया देश की प्रमुख रेडीमिक्स कांक्रीट विनिर्माता है जिसके यहां तीन सीमेंट कारखानों के अलावा दो पिसाई स्टेशन हैं जिनकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 1.1 एमटी (मिलियन टन) है। कंपनी भारत की सबसे बड़ी रेडी-मिक्स कांक्रीट मैनुफैक्चरर में भी शामिल है।

जिंदल और पीरामल को पछाड़ा

सीमेंट निर्माता लाफार्ज इंडिया की संपत्ति का मालिक बनने के लिए तीन कंपनियां दौड़ में थीं। इनमें सज्जन जिंदल की जेएसडब्ल्यू और अजय पीरामल की पीरामल एंटरप्राइजेज भी दौड़ में थीं। लेकिन निरमा के राकेश पटेल और हिरेन पटेल ने आक्रामक बोली लगाकर दोनों को पछाड़ दिया। लाफार्जहोल्सिम के सीईओ इरिक ओल्सेन ने कहा कि सबसे बड़े बोलीदाता के रूप में हमें सही समूह मिला है जो निवेशकों के हित में कारोबार को आगे बढ़ाएगा।

इसलिए उठाया कदम

होल्सिम का भारत में एसीसी और अंबुजा सीमेंट के मार्फत सीमेंट कारोबार है जिसकी सालाना क्षमता 60 एमटी है। दूसरी ओर लाफार्ज की सालाना क्षमता 11 एमटी है, जिसमें से 70 फीसदी यानी 7.8 एमटी पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ में है। वहीं होल्सिम के एसीसी और अंबुजा की पूर्वी भारत में क्रमशः 6.1 और 4.6 एमटी है। इस तरह लाफार्ज और होल्सिम का कारोबार विलय होता तो भारत में पूर्वी क्षेत्र में उसकी क्षमता 18.5 एमटी हो जाती जो पूर्वी भारत की कुल सीमेंट उत्पादन क्षमता 46 एमटी का 40 प्रतिशत हो जाती। इस कारण प्रतिस्पर्धा आयोग ने इसे मंजूरी नहीं दी थी और कंपनी को पूर्वी भारत में कम से कम 5.15 एमटी कारोबार 31 दिसंबर, 2015 तक बेचने को कहा था। पहले भी एसी कोशिश कर चुकी है लाफार्जः फ्रेंच कंपनी लाफार्ज ने अपनी भारतीय संपत्ति को इसलिए बेचा है ताकि वह स्विस कंपनी होल्सिम सीमेंट के साथ अपना विलय पूरा कर सके। दोनों कंपनियों ने अप्रैल 2014 में विलय की घोषणा की थी और दुनिया की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी लाफार्जहोल्सिम बनाने की बात कही थी। कंपनी इससे पहले भी अपनी संपत्ति बेचने का प्रयास कर चुकी थी। लेकिन अंबुजा के पास खनन अधिकार होने के कारण इस सौदे को मंजूरी नहीं िमल पाई थी। इसके बाद 2015 में कंपनी ने बिरला समूह के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था जिसमें संपत्ति बेचने के साथ-साथ ब्रांड-कोनक्राटो और पीएससी और खनिज अधिकारों को 5,000 करोड़ रुपए के चूना पत्थर के पर्याप्त भंडार के लिए बेचना चाहा, लेकिन खनन अधिकारों के हस्तांतरण नियमों में बदलाव के कारण यह भी असफल रहा।  बाद में लाफार्ज ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) को एक संशोधित प्रस्ताव दिया था जो बाद में सीसीआई द्वारा अनुमोदित किया गया था।

सही सहयोगी चुना

लाफार्ज होल्सिम के  मुख्य कार्यकारी अधिकारी(सीईओ), एरिक ओल्सेन ने कहा कि ‘ इस सौदे के साथ विनिवेश कार्यक्रम का दो तिहाई कार्य पूरा हो जाएगा और शेष हिस्से पर काम चल रहा है। हमें भरोसा है कि इस साल के अंत तक अपना लक्ष्य पूरा कर लेंगे। हमारे प्रस्तावित खरीदारों में हमने सही साथी चुन लिया है जो हमारे सभी हितधारकों के हीत बिजनेस को विकास की ओर ले जाएगा।’

लाफार्जहोल्सिम  का लक्ष्य

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 में कंपनी का विनिवेश लक्ष्य 3.5 अरब स्विस फ्रैंक का है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुये वह अपना दक्षिण कोरियाई कारोबार बेच चुकी है और सऊदी अरब में अल्पसंख्यक शेयरधारिता के वंचित करने के समझौते पर हस्ताक्षर कर चुकी हैं।

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