सस्ते बिस्कुट को निगल जाएगा जीएसटी!

कोलकाता/नयी दिल्लीः

देश में सबसे बड़ा कर सुधार माने जा रहे वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से सस्ते बिस्कुट पर खतरा मंडरा रहा है। बिस्कुट विनिर्माताओं ने आगाह किया है कि कम कीमत वाले ग्लूकोज और अन्य तरह के बिस्कुट को प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया गया तो करीब 240 बिस्कुट फैक्टरियां बंद हो जायेंगी। बिस्कुट विनिर्माताओं ने जीएसटी के तहत कम कीमत वाले बिस्कुटों को राहत दिये जाने की मांग की है और कहा कि 100 रुपये प्रति किलो से कम कीमत वाले बिस्कुट कम लाभ देने वाले उत्पाद हैं और मौजूदा समय में केन्द्रीय उत्पादक शुल्क से इन्हें छूट मिली हुई है।
बिस्कुट विनिर्माता कल्याण संघ के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता मयंक शाह (पारले उत्पादों के उप विपणन प्रबंधक) ने बताया, ‘बिस्कुट पर प्रस्तावित एकसमान 12 प्रतिशत की जीएसटी, गरीबों के साथ अन्याय साबित होगा क्योंकि 100 रुपये प्रति किलो से नीचे खुदरा बिक्री होने वाले बिस्कुट को ‘मेरिट गुड्स’ माना जाता है। अगर इन उत्पादों को शामिल किया गया तो बड़ी संख्या में बिस्कुट फैक्टरियां बंद हो जायेंगी।’
20 वर्ष में दोगुना भी नहीं हुई कीमत
बिस्कुट विनिर्माता कल्याण संघ के अध्यक्ष हरेश दोषी ने कहा, ‘लागत  मूल्य में 225 प्रतिशत की वृद्धि होने के बावजूद ग्लुकोज बिस्कुट की कीमत  में अधिक वृद्धि नहीं हुई है। वर्ष 1996 में ग्लुकोज बिस्कुट की खुदरा कीमत  40 रुपये किलो थी और 20 वर्षों के बाद भी यह कीमत मात्र 70 रुपये किलो ही  है। बिस्कुट विनिर्माताओं को 100 रुपये प्रति किलो से नीचे वाले बिस्कुट पर  केवल दो से तीन प्रतिशत का मुनाफा बचता है।’
70 से 700 रुपये किलो तक दाम
भारत में बिस्कुट की कीमत 70 रुपये से 700 रुपये प्रति किलो के दायरे में है। बिस्कुट विनिर्माता कल्याण संघ के अनुसार भारत में बिस्कुट उद्योग का आकार मौजूदा समय में 37,500 करोड़ रुपये का होने का अनुमान है।
बनाने में आगे, खाने में पीछे है बंगाल
बिस्कुट बनाने के मामले में बंगाल काफी आगे है, लेकिन खाने के मामले में काफी पीछे है। बंगाल में कई बड़े ब्रांड के अलावा छोटे ब्रांड वाली अनेक बिस्कुट फैक्टरी हैं। देशभर में लोग प्रत्येक वर्ष 36 लाख टन बिस्कुट टन खाते हैं।
इनमें सबसे  अधिक बिस्कुट के शौकीन लोग महाराष्ट्र में हैं, जो एक साल में  एक लाख नब्बे टन बिस्कुट खा जाते हैं।
बिस्कुट खाने में दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड हैं  जहां सालाना करीबन एक लाख 85 हजार टन बिस्कुट की खपत है। तमिलनाडु एक लाख  ग्यारह हजार, पश्चिम बंगाल एक लाख दो हजार, कर्नाटक 93 हजार, मध्य प्रदेश  और छतीसगढ़ 80 हजार, बिहार और झारखंड में 62500, राजस्थान 62500, गुजरात 72 हजार, आंध्र प्रदेश के लोग 52500  टन बिस्कुट खा जाते हैं।

महंगे बिस्कुटों पर लगेगा 18% कर
शाह ने कहा कि कम लागत वाले बिस्कुट कुल होने वाली बिस्कुट की बिक्री का 40 प्रतिशत भाग हैं, लेकिन अगर जीएसटी के तहत इन पर कर लगाया गया तो यह बिक्री घटकर 20 से 25 प्रतिशत रह जायेगी। हालांकि बिस्कुट विनिर्माताओं में इस बात की सहमति है कि सरकार महंगे बिस्कुटों पर 18 प्रतिशत तक का भी अधिक कर लगा सकती है।

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