महिला-पुरुषों की कमाई में भारी अंतर

देश में महिलाओं के मुकाबले पुरूषों की औसत कमाई 67 प्रतिशत अधिकः रिपोर्ट

नई दिल्लीः अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दुनियाभर में महिलाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा और विश्व में उनके योगदान को स्मरण करते हुए उनका सम्मान किया जा रहा है और ऐसे में महिलाओं की हकीकत बयां करने वाली रिपोर्ट आयी है। भारत में स्त्री-पुरुष के बीच औसत कमाई में कुल 67 फीसदी का अंतर है। जहां पुरुषों की औसत कमाई 167 डाॅलर है वहीं महिलाएं 100 डाॅलर कमाती हैं। एसेंचर रिसर्च के मुताबिक इसका कारण पुरुषों का महिलाओं की तुलना में अधिक संख्या में उच्च वेतन वाले पदों पर काबिज होना है। साथ ही शैक्षणिक स्तर, उद्योग और कार्य घंटे जैसे कारणों से भी वेतन अंतर है।
क्यों है अंतर?
एसेंचर इंडिया की चेयरमैन और वरिष्ठ प्रबंध निदेशक रेखा मेनन के मुताबिक, ‘शिक्षा में सुधार और काम के अवसर बढ़ने जैसे हाल की सफलता के बावजूद सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दे प्रायः महिलाओं को करियर के महत्वपूर्ण चरणों में पीछे हटने को मजबूर करते हैं। इससे अंतर बढ़ता है।’ वैश्विक स्तर पर महिलाएं औसतन 100 डाॅलर कमाती हैं जबकि पुरुषों के मामले में यह 140 डाॅलर है। असंतुलन बढ़ने का एक कारण यह भी है कि कार्य में महिलाओं की तुलना में पुरुषों को तरजीह दी जाती है। एसेंचर के चेयरमैन और मुख्य कार्यपालक अधिकारी पियरे नानतेरमे के मुताबिक, ‘समावेशी कार्यस्थल के लिये स्त्री-पुरुष समानता एक महत्वपूर्ण तत्व है’

लागू हो यूनिवर्सल बेसिक आय
नई दिल्लीः समाज के प्रति महिलाओं के महत्त्वपूर्ण योगदान का उल्लेख करते हुए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन शीर्ष उद्योग संगठन एसोचैम ने कहा कि देश के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने के लिए महिलाओं के लिए यूनिवर्सल बेसिक आय (यूबीआई) के कार्यान्वयन की आवश्यकता है। ‘हालांकि, वर्तमान में भारत पूरी तरह से यूबीआई में शामिल होने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि देश में समृद्ध और गरीब के बीच का अंतर काफी चौड़ा है और यह आर्थिक प्रतिमान के सभी स्तरों पर समान लाभ देने के लिए समानता नहीं है। ऐसे में यूबीआई को महिलाओं के लिए अनुकूल माना जा सकता है’।  महिलाओं को रोजमर्रा के जीवन के लगभग हर पहलू में बदतर भेदभाव का सामना करना पड़ता है चाहे वो रोजगार के अवसर हो, शिक्षा, स्वास्थ्य या वित्तीय समावेशन हो।

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