प्रतिभा पलायन की जगह प्रतिभा तंत्र का करें विकास

नई दिल्लीः राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय छात्र स्टार्टअप नीति की शुरुआत की। आॅल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्नीकल एजुकेशन (एआईसीटीई) द्वारा निर्मित राष्ट्रीय छात्र स्टार्टअप नीति का लक्ष्य 100,000 तकनीकी आधारित छात्र स्टार्टअप की शुरुआत करना तथा उसके जरिए अगले 10 साल में 10 लाख रोजगार के अवसर पैदा करना है। इस नीति के तहत तकनीकी संस्थाओं के बीच मजबूत आपसी सहयोग के जरिए लक्ष्य को हासिल करने की योजना है। इसका पूरा ध्यान भारतीय युवा को स्टार्टअप नीति के लिए बेहतर तकनीकी सुविधा उपलब्ध कराना है।

रोजगार बढ़ेगा तो गुणवत्ता बढ़ेगी

इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि अगर देश में रोजगार बढ़ेगा तो काम की गुणवत्ता भी बढ़ेगी। लेकिन अगर युवा रोजगार को लेकर परेशान होंगे तो देश में हालात बिगड़ेंगे। नौकरियां पैदा करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। 2015 के आंकड़ों के मुताबिक 1.35 लाख नौकरियां मिली जो कि पिछले 7 साल में सबसे कम है, ये स्थिति सही नहीं है। छात्रों जो की नई खोज कर रहे हैं, उद्यमी बन रहे हैं उनके लिए बाजार मुहैया कराना होगा। अगर हमें उचित विकास की दर के साथ आगे बढ़ना है तो फिर हमारे केंद्रीय संस्थानों के प्रमुखों को इसे अपनी जिम्मेदारी की तरह लेना होगा।

मंत्रालय जल्द दे परियोजनाओं को मंजूरी

इस नीति में उच्च शिक्षण संस्थान के छात्रों की उद्यमशीलता को उभारने की काफी क्षमता है। आर्थिक प्रगति के हिसाब से हमारे शैक्षिक संस्थानों की वैश्विक रैंकिंग मेल नहीं खा रही है। उन्होंने कहा कि 7 आईआईटी खड़गपुर, कानपुर, दिल्ली, मद्रास, गुवाहाटी, रुड़की द्वारा मिलकर बनाई गई परियोजनाओं को मानव संसाधन मंत्रालय जल्द मंजूरी दे ताकि इसे जल्द से जल्द लागू किया जा सके।

देशी और विदेशी प्रतिभा को आकर्षित करें

मानव संसाधन और विकास मंत्रालय का सरकारी और निजी क्षेत्रों के साथ मिलकर 10 विश्व स्तरीय संस्थान बनाने का कदम भी सराहनीय है। विश्व स्तरीय संस्थान बनाने का रास्ता प्रतिभा, संसाधन और मैनेजमेंट के जरिए होकर जाता है। हमारे संस्थानों के पास ना सिर्फ देसी बल्कि विदेशी प्रतिभा को भी अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता होनी चाहिए। हमारे संस्थानों में गुणवान छात्र और विश्व स्तरीय शिक्षकों की भरमार होनी चाहिए। विभिन्न फंडिंग, बातचीत और आपसी सहयोग के जरिए जरूरत के हिसाब से अपने संस्थानों को विकसित करना होगा। उन्होंने संस्‍थानों के प्रमुखों से कहा कि हमें प्रतिभा पलायन की जगह प्रतिभा विकास के लिए नेटवर्क बनाने की जरूरत है। विश्व स्तरीय संस्थान वित्तीय संसाधनों के जरिए ही विकसित किए जा सकते हैं। शासकीय संस्थानों में सरकारी फंडिंग बजट प्रावधानों तक ही सीमित है। सरकारी संस्थानों में जरूरी सुविधाओं के विकास के लिए दूसरे स्रोत से भी मदद लेनी होगी।

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