थोक महंगाई से राहत, घटकर हुई 3.39 फीसदी

अब खुदरा महंगाई में गिरावट की उम्मीद, अभी बीते 13 महीने के न्यूनतम स्तर पर

नई दिल्ली: थोक महंगाई दर में गिरावट देखने को मिली है। अक्टूबर महीने में थोक महंगाई दर (डब्ल्यूपीआई) घटकर 3.39 फीसदी पर आ गई है। सितंबर माह में भी थोक महंगाई दर घटकर 3.57 फीसदी रही थी। खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर भी घटी है। अक्टूबर महीने में खाद्य महंगाई दर 7 महीने के निचले स्तर पर आ गई है। महीने दर महीने आधार पर अक्टूबर में खाद्य महंगाई दर 5.75 फीसदी से घटकर 4.34 फीसदी रही। महीने दर महीने आधार पर अक्टूबर में प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर 4.76 फीसदी से घटकर 3.31 फीसदी रही है। वहीं महीने दर महीने आधार पर अक्टूबर में सब्जियों की महंगाई दर -10.91 फीसदी के मुकाबले -9.97 फीसदी रही है। महीने दर महीने आधार पर अक्टूबर में दालों की महंगाई दर 23.99 फीसदी से घटकर 21.8 फीसदी रही है।

थोक महंगाई के बाद अब एक्सपर्ट खुदरा महंगाई में भी आगे गिरावट की उम्मीद लगा रहे हैं। बीते महीने आए आंकड़ों के मुताबिक देश में खुदरा महंगाई दर 13 महीने के निचले स्तर पर चल रही है। सब्जी, दलहनों और दूध तथा अंडों के सस्ता होने खुदरा मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में घटकर 4.31 प्रतिशत पर आ गई थी। आपको बता दें कि इस गिरावट के साथ यह बीते 13 महीनों का न्यूनतम स्तर माना जा रहा है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त में 5.05 प्रतिशत रही थी। जबकि यह पिछले साल सितंबर में 4.41 प्रतिशत रही थी।

आने वाले दिनों नें भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से नीतिगत दरों में कमी की उम्मीद बढ़ गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक ओर जहां देश में महंगाई में कमी आ रही है, वहीं दूसरी ओर नोटबंदी के बाद बैंकों में भारी मात्रा में एकत्र हुई नकदी है। इसके बाद बैंकों के पास ब्याज दरें घटाने का रास्ता खुलता है।

2018 तक आरबीआई के लक्ष्य तक पहुंचेगी महंगाई दरः फिच

ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने सोमवार को अनुमान किया है कि वर्ष 2018 के अंत तक महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मध्यकालिक लक्ष्य दो-छह फीसदी तक पहुंचेगी। रेटिंग एजेंसी ने अपनी द्विमासिक समीक्षा में कहा, ‘फिच का अनुमान है कि मुद्रास्फीति वर्ष 2018 के अंत तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मध्यकालिक लक्ष्य के अनुरूप 2-6 फीसदी के बीच रहेगी।’

फिच रेटिंग का कहना है कि आरबीआई की नीति में पुरानी स्थिति की तुलना में अर्थव्यवस्था का मौजूदा स्वरूप यह तय करेगा कि क्या मुद्रास्फीति को लक्षित नया ढांचा सही मायने में शासन में बदलाव है।

फिच ने कहा कि रघुराम राजन के आरबीआई गवर्नर के रूप में तीन साल के कार्यकाल में रुपया स्थिर था, इसलिए यह कहा जा सकता है कि उनके जाने से थोड़ी घबराहट फैली है।

फिच वायर के वरिष्ठ विश्लेषक डेन मार्टिन के मुताबिक, ‘हालांकि आरबीआई को चलाने के लिए राजन के जैसा ही हाईप्रोफाइल गर्वनर चाहिए, ऐसा नहीं है। क्योंकि केंद्रीय बैंक की प्राथमिकता महंगाई और आर्थिक स्थिरता है।’आरबीआई के नए प्रमुख उर्जित पटेल हैं। साथ ही नवस्थापित छह लोगों की मौद्रिक नीति समिति ही मौद्रिक नीति के फैसले लेती है। राजन के जाने के बाद इस समिति की पहली बैठक में ब्याज दरों में कटौती का निर्णय लिया गया था।

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