चीन-ट्रंप के खराब रिश्ते एशिया के लिए खतरा

नई दिल्लीः अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की जीत जहां चीन की चिंता को बढ़ा सकती है, वहीं एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी यह शुभ संकेत नहीं है। चीन के लिए ज्यादा चिंता का विषय इसलिए है कि वह ट्रंप के निशाने पर रहा है। पूरी तौर पर अभी चीन की अर्थव्यवस्था ऊबर भी नहीं पाई है। ऐसे में चीन की मुसीबत बढ़ सकती है। ट्रंप चीनी मालों पर दंडात्मक टैरिफ बढ़ाना चाहते हैं। वह चीन को करंसी बिगाड़ने वाली अर्थव्यवस्‍था करार देने के पक्ष में हैं। इस तरह के कदम से चीनी निर्यात प्रभावित होगा। साथ ही अगर पेइचिंग ने बदले की भावना से ट्रेड वॉर छेड़ी तो इससे एशियाई अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।

मॉर्गन स्टैनली के अनुसार, ‘अमेरिका के व्यापार और सुरक्षा में बड़े बदलाव से इस क्षेत्र के साथ उसके संबंध में खटास आएगी और नकारात्मक असर पड़ने का खतरा है।’ चीन के साथ व्यापार के मार्ग में बाधा पैदा करने से पेइचिंग के पॉलिसी मेकर्स को कुछ ऐसे उपायों का सहारा लेना पड़ेगा, जो ठीक नहीं है। यानी उनके सामने दो ही विकल्प होंगे या तो कमजोर निर्यात के कारण ग्रोथ में गिरावट स्वीकार करें या बदले की कार्रवाई करे। कमजोर युआन से कैपिटल आउटफ्लो में तेजी आएगी जिससे चीन के इंटरनैशनल रिजर्व्स पर दबाव बढ़ेगा और वह कम रफ्तार से आगे बढ़ रही इकॉनमी में लगे अपने पैसे को निकालने के लिए मजबूर होगा।

सर्वे में जताई थी चिंता

जुलाई में नोमुरा होल्डिंग्स इंक ने एक सर्वे कराया था। इस सर्वे में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने पर कई चीजों को लेकर चिंता जताई गई थी। इसमें व्यापार में संरक्षणवादी नीति से लेकर एशिया में सैन्य सहायता कम करने के यूएस के कदम से क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा होने की आशंका जताई गई है। नोमुरा की सर्वे रिपोर्ट ‘ट्रंपिंग एशिया’ में 77 फीसदी लोगों का मानना था अमेरिक ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाच चीन को करंसी बिगाड़ने वाला करार दे देगा। 75 फीसदी लोगों का मानना था कि वह चीन, दक्षिण कोरिया और जापान से आयात पर टैक्स लगाएंगे। सिर्फ 37 फीसदी लोगों का मानना था कि वह मेक्सिकन बॉर्डर पर दीवार बनाने के अपने वादे को पूरा करेंगे।

ट्रंप को लेकर निवेशकों की चिंता बेकार नहीं है। एशिया दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब है और कई राष्ट्र निर्यात पर आश्रित हैं। ऐसे में अगर आयात पर टैक्स बढ़ता है तो उनके लिए खतरा पैदा हो जाएगा। पिछले साल चीन अमेरिका का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर था। अगर इसके साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगाया गया तो इसका असर बाकी एशिया पर भी पड़ेगा।

एशिया के देशों में दक्षिण कोरिया और फिलीपींस बुरी तरह प्रभावित होगा। दक्षिण कोरिया पर दो तरफा मार पड़ेगी। ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ 2012 के फ्री ट्रेड करार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इससे 1,00,000 अमेरिकियों की नौकरी छिन गई है। इसके अलावा यूएस ने दक्षिण कोरिया को जो सुरक्षा दी है, उसका पूरा खर्च दक्षिण कोरिया को उठाना होगा।

फिलीपींस को ट्रंप की संभावित अप्रवास प्रतिबंध नीति से खतरा है। विदेश में काम करने वाले फिलीपींस के नागरिकों में से अकेले 35 फीसदी अमेरिका में है। इसके अलावा दक्षिण पूर्व एशिया में फिलीपींस अमेरिका के लिए सबसे बड़ा आयातक है। ट्रंप ने यूएस में जॉब वापस लाने की धमकी दी थी, इससे फिलीपींस का कारोबार प्रभावित हो सकता है।

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